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Himachal Pradesh

मुख्यमंत्री के वित्तीय कुप्रबंधन से रुक सकती है सैलरी और पेंशन : जय राम ठाकुर

धर्मशाला, 07 फ़रवरी । पूर्व मुख्यमंत्री एवं वर्तमान नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने अपने कांगड़ा प्रवास के पहले दिन शनिवार को पालमपुर में भाजपा के शहरी और ग्रामीण मंडलों की महत्वपूर्ण बैठकों में शिरकत की। इस दौरान उन्होंने जहां पार्टी कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए आगामी राजनीतिक चुनौतियों के लिए अभी से कमर कस लेने का आह्वान किया। वहीं प्रदेश कांग्रेस सरकार पर भी जमकर हमला बोला। जयराम ठाकुर ने प्रदेश की वर्तमान राजनीतिक और आर्थिक स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य में जिस प्रकार के हालात बन चुके हैं, उन्हें देखते हुए भाजपा कार्यकर्ताओं को पूरी तरह सतर्क और सक्रिय हो जाना चाहिए क्योंकि प्रदेश में ‘कभी भी कुछ भी’ घटित हो सकता है।

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर सीधा हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस झूठ बोलकर सत्ता में आई है और अपने वित्तीय कुप्रबंधन से इस खुशहाल प्रदेश को कर्ज के दलदल में धकेल दिया है। ठाकुर ने मुख्यमंत्री को सलाह दी कि वे केवल ‘व्यवस्था परिवर्तन’ का खोखला राग अलापना बंद करें और अपनी हठधर्मिता त्याग कर राज्य को कर्ज के भारी बोझ से बाहर निकालने हेतु ठोस कदम उठाया जाए।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि मुख्यमंत्री पिछले तीन वर्षों से हर मंच से यह दावा करते रहे कि वे 2027 तक हिमाचल को आत्मनिर्भर और 2032 तक देश का सबसे समृद्ध राज्य बनाएंगे, लेकिन अब उनकी सारी ‘हेकड़ी’ निकल चुकी है और वे बजट का रोना रो रहे हैं।

जयराम ठाकुर ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद होने का जो शोर मचा रहे हैं, उसके बारे में उन्हें 15वें वित्त आयोग के समय ही सूचित कर दिया गया था कि 16वें वित्त आयोग में यह सुविधा नहीं मिलेगी, इसके बावजूद वित्त विभाग का जिम्मा संभालने वाले मुख्यमंत्री ने कोई तैयारी नहीं की और केवल झूठी गारंटियों का ढोल पीटते रहे। उन्होंने कहा कि एक तरफ मुख्यमंत्री खजाना खाली होने का विलाप कर रहे हैं और दूसरी तरफ अपने ‘मित्रों’ को कैबिनेट रैंक बांटकर सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ डाल रहे हैं।

जय राम ठाकुर ने चेतावनी दी कि वित्तीय कुप्रबंधन के कारण अब प्रदेश में हर माह मिलने वाली सैलरी और पेंशन रुकने की नौबत आ गई है, विधायक निधि रोक दी गई है और पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बावजूद सरकार चुनाव कराने से डर रही है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने स्मार्ट मीटर टेंडर प्रक्रिया में बड़े घोटाले का आरोप लगाते हुए कहा कि पूरी प्रक्रिया संदिग्ध है और केवल चहेतों को लाभ पंहुचाने के लिए नियम ताक पर रखे गए हैं।

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