गुरुग्राम: अपनी संस्कृति से दूर होकर लोग कष्ट झेल रहे हैं: कौशिक जी महाराज
गुरुग्राम, 14 फरवरी । गौतीर्थ तुलसी तपोवन गौशाला वृंदावन के संचालक एवं विश्व प्रसिद्ध कथावाचक पुराण मनीषी परम पूज्य श्री कौशिक जी महाराज ने तीसरे दिन की श्री शिवमहापुराण कथा एवं गोमहोत्सव के तीसरे दिन अपने प्रवचनों में कहा कि अगर हमें अच्छे लोगों से मिलना है तो खुद अच्छा बनना पड़ेगा।
यहां सोहना अड्डा के निकट ओल्ड जेल कॉम्पलेक्स में की जा रही श्री शिवमहापुराण कथा एवं गोमहोत्सव में पहुंचे श्रद्धालुओं को श्री कौशिक जी महाराज ने शिवजी, शिवलिंग, मां पार्वती की महिमा का गुणगान किया। उन्होंने कहा कि यह बात भगवान शिव स्वयं कहते है कि जो उनकी पूजा करते हैं तो मुझमें और उनमें कोई भेद नहीं है। यदि व्यक्ति ने भगवान शिव की पूजा करने वाले का भी दर्शन कर लिया तो समझो काशी पहुंचकर विश्वनाथ का दर्शन कर लिया। उन्होंने लोगों को धर्म के रास्ते पर चलने का संदेश देते हुए कहा कि जो लोग दुनिया को खत्म करने में लगे हैं, बुरा करने में लगे हैं, उनसे दूरी ही बनाकर रखें। ऐसे लोगों से दूरी बनाकर रखो।
उन्होंने कहा कि जो लोग देवी देवताओं की सेवा में लगे हैं, हमें उनकी सेवा करनी चाहिए। वह भी भगवान महादेव की सेवा ही होगी। भगवान और इंसान की सेवा में किसी तरह का दिखावा नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि घर से एक लौटा जल ले जाकर शिवलिंग पर अभिषेक तो करें ही, साथ ही मंदिर के जल से भी अभिषेक करें। पूजा विधि के अनुसार करें। भगवान शिव को चंदन चढ़ाने की भी उन्होंने कांसे की थाली का महत्व बताते हुए कहा कि जब भी घर में कोई महात्मा आ जाए तो उनके कांसे की थाली में चरण धोएं। पूजा में इस थाली का बहुत महत्व है।
कांसे के पात्र में कभी शहद ना रखें वह अपवित्र हो जाता है। बेटी के विवाह में कांसे के बेला का बहुत महत्व होता है। कांसे के बेला में बुरा भरकर उसमें चांदी का सिक्का रखकर बेटी के सास-ससुर को भेंट करें। इससे बेटी अपनी ससुराल में कभी दुखी नहीं रहेगी। उस घर की यश, कीर्ति बढ़ेेगी। सभी सुख, साधन वहां होंगें। सभी कष्ट मिट जाएंगें। यह हमारी संस्कृति का हिस्सा रहा है, मगर समय के साथ हमने इसे अपने से दूर कर दिया है। इसलिए हम कष्ट झेल रहे हैं।