गुरुग्राम: देश में खेलों की धरती के रूप में अपनी पहचान बना चुका है हरियाणा: नायब सिंह सैनी
गुरुग्राम, 09 फरवरी । मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि हरियाणा खेलों का पावर हाउस बन चुका है, जिसकी माटी फसल ही नहीं उगाती, बल्कि मैदान में चैंपियन भी पैदा करती है। अब हरियाणा केवल किसानों और जवानों की भूमि ही नहीं, बल्कि खेलों की धरती के रूप में पूरे देश में अपनी पहचान बना चुका है। आज राष्ट्रीय खेलों से लेकर ओलंपिक तक हरियाणा की गूंज सुनाई देती है। सरकार का उद्देश्य है प्रदेश का कोई भी प्रतिभाशाली खिलाड़ी संसाधनों के अभाव में पीछे न रहे।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी सोमवार को गुरुग्राम स्थित ताऊ देवी लाल स्टेडियम में मुख्यमंत्री कप का शुभारंभ एवं 38वें राष्ट्रीय खेलों के पदक विजेताओं को पुरस्कार वितरित करने के उपरांत उपस्थितगण को संबोधित कर रहे थे।
इस अवसर पर उन्होंने राष्ट्रीय खेलों के 417 पदक विजेता तथा प्रतिभागी खिलाडिय़ों को लगभग 24 करोड़ रुपये की राशि पुरस्कार स्वरूप प्रदान की। उन्होंने हॉकी खिलाड़ी पद्मश्री सविता पूनिया को भी सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन हरियाणा की खेल प्रतिभा, अनुशासन, परिश्रम और संकल्प का उत्सव है तथा आज गुरुग्राम की यह पावन धरती दो खेल उत्सवों के रंग में रंगी है। हरियाणा की मिट्टी केवल फसल ही नहीं बल्कि चैंपियन भी पैदा करती है। इस भूमि पर पसीना बहाकर खेलों में इतिहास रचा जाता है। मुख्यमंत्री कप के प्रतिभागियों को प्रोत्साहित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तीन दिवसीय मुख्यमंत्री कप की छह खेल प्रतियोगिताओं में 3600 खिलाड़ी भाग ले रहे हैं। इस कप में स्वर्ण पदक विजेता को एक लाख रुपये, रजत पदक विजेता को 70 हजार रुपये तथा कांस्य पदक विजेता को 50 हजार रुपये का नकद इनाम दिया जाएगा।
पहली बार 800 से अधिक खिलाडिय़ों का सम्मान: गौरव गौतम
हरियाणा के खेल एवं युवा अधिकारिता मंत्री गौरव गौतम ने कहा यह दिन देश के खेल इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हुआ है जिसमें सेंकड़ों खिलाडिय़ों को एक ही अवसर पर सम्मानित किया जा रहा है। 38वें राष्ट्रीय खेलों में हरियाणा के 689 खिलाडिय़ों ने भाग लिया, जिनमें से 153 खिलाडिय़ों ने पदक जीतकर प्रदेश और देश का मान बढ़ाया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा एक क्लिक के माध्यम से करोड़ों रुपये की प्रोत्साहन राशि खिलाडिय़ों को दी जा रही है, जो खिलाडिय़ों के संघर्ष, अनुशासन और समर्पण का सम्मान है। यह पहल न केवल खिलाडिय़ों का हौसला बढ़ाएगी, बल्कि आने वाली पीढ़ी को भी खेलों की ओर प्रेरित करेगी।