कपासन रिको स्थित केमिकल फैक्ट्री के धमाके से दहला क्षेत्र, दूर तक सुनाई दी धमाके की गूंज, आग की चपेट में पड़ोसी कारखाना
चित्तौड़गढ़, 10 फ़रवरी । जिले में कपासन के रिको क्षेत्र में उपखंड कार्यालय के पीछे संचालित एक केमिकल फैक्ट्री में सोमवार रात जबरदस्त विस्फोट के साथ आग लग गई। रात को अचानक हुए धमाके की आवाज 5 किलोमीटर तक सुनाई दी, जिससे आसपास के गांवों और कपासन कस्बे में दहशत व्याप्त हो गई। धमाके की आवाज के साथ लोग डर कर घरों से बाहर आ गए और फैक्ट्री में लगी भीषण आग एक किलोमीटर दूर तक दिखाई देने लगी। पुलिस एवं प्रशासन के अधिकारियों ने मौका देखा है।
जानकारी के अनुसार उपखंड कार्यालय के पीछे स्थित मेहरून इण्डस्ट्री नामक केमिकल फैक्ट्री में रात करीब साढ़े 11 बजे धमाके के साथ आग लग गई। आग लगने के साथ ही पास की स्क्रेप फैक्ट्री को भी उसने अपनी चपेट में ले लिया। इस वजह से पड़ोस के कारखाने की चद्दर भी उड़ गई। हादसे की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि फैक्ट्री से उछल कर एक वॉल्व 500 मीटर दूर एक मकान पर जा गिरा जिससे घर के छत की पट्टी टूट गई। सबसे बड़ी बात यह रही कि बाइलर का 8 क्विंटल वजनी हिस्सा उड़ कर पंचायत समिति परिसर में जा गिरा और दूर-दराज तक एक दर्जन से अधिक घरों पर बाइलर के टुकड़े जा गिरे। गनीमत यह रही कि रात का समय होने के चलते लोग घरोंं में सो रहे थे, जिससे जनहानि नहीं हुई। सूचना के बाद प्रशासन, पुलिस और फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंची। आग इतनी भयानक थी कि फायर ब्रिगेड की पांच दमकलों को आग पर काबू करने में दाे घंटे से अधिक का समय लगा। देर रात तक कोशिशों के बाद आग पर नियंत्रण पाया गया। प्रारंभिक तौर प्लांट में बायलर फटने की आशंका जताई जा रही है। वास्तवित कारणों का खुलासा जांच के बाद ही हो पायेगा।
फैक्ट्री में कुछ संदेहास्पद तो नहीं
कपासन के रिको क्षेत्र में स्थित मेहरून इण्डस्ट्री नामक कारखाने के बारे में जानकारी लेने पर पता चला कि कथित रूप से कोई केमिकल कलर का निर्माण किया जाता था। छीपा मोहल्ला, चित्तौड़गढ़ निवासी सलीम नामक व्यक्ति फैक्ट्री का संचालक था, जो 10 साल से अधिक समय से इसका संचालन कर रहा था। बताया जाता है कि एसिड और दूसरे घातक केमिकल से उत्पाद बनाये जाते थे लेकिन फैक्ट्री में स्पष्ट रूप से यह जानकारी नहीं मिल पाई कि किस चीज का उत्पादन था और कहां सप्लाई होता था। कथित रूप से फैक्ट्री में कलर केमिकल के उत्पादन की बात सामने आई है। इधर, प्रशासनिक तौर पर बताया गया कि फैक्ट्री में इंटरमिटिएड केमिकल का उत्पादन किया जाता था। सवाल यह है कि इतना बड़ा विस्फोट होना किस केमिकल की मौजूदगी में हो सकता है। इसकी जांच जरूरी होगी।
सुरक्षा पर भी उठ रहे सवाल
रिहायशी क्षेत्र में चल रही इस प्रकार की फैक्ट्री को लेकर सुरक्षा के सवाल भी खड़े हुए है, जहां एक ओर सामान्य इण्डस्ट्री के लिए स्वीकृतियां लेने में उद्योगपति की चप्पलें घिस जाती है। ऐसे में इस प्रकार के खतरनाक केमिकल की फैक्ट्री कैसे संचालित हो रही थी। यह भी सवाल खड़े करता है। वहीं रिहायशी क्षेत्र में इसकी स्वीकृति कैसे मिली और कब-कब इसकी जांच की गई यह भी जांच का विषय होगा। जानकारी है कि आजोलिया का खेड़ा ओद्योगिक क्षेत्र सहित अन्य क्षेत्राें में भी कथित रूप से केमिकल प्लांट संचालित हो रहे है ऐसे में बड़ा हादसा न हो इसके लिए भी प्रशासन को मुस्तैद रहना होगा।
कलक्टर ने लिया जायजा
घटना की गंभीरता को देखते हुए जिला कलक्टर आलोक रंजन, क्षेत्रीय विधायक अर्जुन लाल जीनगर, पुलिस अधीक्षक, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सहित अन्य अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौके पर पहुंच गए। कोई अनहोनी नहीं हो इसके लिए सुरक्षा घेरा बना दिया गया। अधिकारियों ने आस-पास हुए नुकसान के आंकलन के निर्देश दिए है। इस संबंध में विधायक ने कहा कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और किन कारणों से हादसा हुआ यह जांच का विषय है। हालांकि कोई जनहानि की सूचना नहीं है। जिला कलक्टर ने मामले की जांच के निर्देश दिये है।
इंवेस्टिगेशन टीम पहुंची, नुकसान का आंकलन
घटना के बाद सुबह प्रशासन ने घटना के कारणाें की जांच शुरु कर दी। मोबाइल इन्वेस्टिगेशन टीम भी मौके पर पहुंची और जिन क्षेत्रों में नुकसान हुआ उस क्षेत्र का जायजा लिया। पंचायत समिति के सामने मकानों के सौलर को नुकसान पहुंचा। कई घरों की दीवारों में दरारें पड़ गई। रेलवे स्टेशन क्षेत्र तक में विस्फोट से टुकड़े उड़कर गिरे है। सुरक्षा के लिहाज से मामले की पूरी जांच की जा रही है।