खानपुर में एसीजेएम कोर्ट पर फैसला अभी बाकी, हाईकोर्ट की हरी झंडी का इंतजार
जयपुर, 03 फ़रवरी । खानपुर क्षेत्र के लोगों को अदालत की दहलीज तक जल्द न्याय मिलने की उम्मीद तो है, लेकिन अंतिम मुहर अभी राजस्थान उच्च न्यायालय के हाथ में है। विधानसभा में मंगलवार को विधि एवं विधिक कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने साफ किया कि खानपुर में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) न्यायालय खोलने का निर्णय हाईकोर्ट की सहमति मिलने के बाद ही गुण-दोष के आधार पर लिया जाएगा।
प्रश्नकाल के दौरान विधायक सुरेश गुर्जर के सवाल पर मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार की ओर से हाईकोर्ट को कई बार सहमति के लिए पत्र भेजे जा चुके हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस मामले में एक बार फिर उच्च न्यायालय से अनुरोध किया जाएगा, ताकि खानपुर को न्यायिक सुविधा का लाभ मिल सके।
मंत्री ने सदन को बताया कि प्रदेश में जब भी कहीं नया न्यायालय खोलने का प्रस्ताव आता है, तो उसे पहले उच्च न्यायालय को भेजा जाता है। हाईकोर्ट की सहमति मिलने के बाद ही गुणावगुण के आधार पर फैसला लिया जाता है। उन्होंने इसे एक सतत और संवैधानिक प्रक्रिया बताया।
विधि मंत्री ने पूर्ववर्ती और वर्तमान सरकार के कार्यकाल की तुलना करते हुए कहा कि पिछली सरकार ने पूरे पांच साल में केवल 2 जिला न्यायालय, 1 सीजेएम कोर्ट, 5 पॉक्सो कोर्ट और 1 एसीबी कोर्ट खोले। वहीं वर्तमान सरकार ने महज 2 साल में 8 जिला न्यायालय, 8 सीजेएम कोर्ट, 5 पॉक्सो कोर्ट और 7 एसीबी कोर्ट स्थापित कर दिए हैं। यह न्यायिक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम है।
मंत्री ने बताया कि खानपुर में वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश एवं एसीजेएम कोर्ट की स्थापना का प्रस्ताव हाईकोर्ट द्वारा 8 दिसंबर 2016 को राज्य सरकार को भेजा गया था। साथ ही खानपुर में एडीजे/कैम्प कोर्ट खोलने का प्रस्ताव फिलहाल हाईकोर्ट की समिति के समक्ष विचाराधीन है।
खानपुर को न्यायिक सुविधा मिलने की राह खुली है, लेकिन अंतिम फैसला हाईकोर्ट की सहमति पर टिका है। अब निगाहें उसी हरी झंडी पर हैं, जो खानपुर को एक नई अदालत की सौगात दिला सकती है।