राजगढ़ः न्यायालय में झूठी गवाही देने वाले को एक वर्ष की सजा
राजगढ़, 28 फरवरी । मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नीलिमा देवदत्त की कोर्ट ने शनिवार को निर्णय सुनाते हुए न्यायालय में झूठी गवाही देने वाले अभियुक्त को एक वर्ष का सश्रम कारावास एवं एक हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है।
जानकारी के अनुसार जगन्नाथ दांगी के द्वारा पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त भोपाल को एक लिखित आवेदन प्रस्तुत किया गया, जिसमें ठेकेदारी के कार्य के संबंध में शेष भुगतान राशि 9 लाख 46 हजार रुपये के बिल के भुगतान करने के लिए आरईएस एसडीओ के द्वारा 9 प्रतिशत के हिसाब से रिश्वत मांगे जाने के संबंध में उचित कार्रवाई हेतु लेख किया गया था। शिकायत के आधार पर लोकायुक्त कार्यालय भोपाल द्वारा वाइस रिकाॅर्डर में फरियादी ने अभियुक्त आरईएस एसडीओ की आवाज रिकाॅर्ड की गई थी।
विवेचना के उपरांत अभियोग पत्र विशेष न्यायालय में भ्रष्टाचार अधिनियम की धारा 7, 12, 13(1)डी, 13(2), 120 में प्रस्तुत किया। विचारण के दौरान न्यायालय में फरियादी जगन्नाथ के द्वारा न्यायालय के समक्ष स्वयं के द्वारा प्रस्तुत शिकायत आवेदन पत्र एवं लोकायुक्त भोपाल के द्वारा की गई कार्यवाही में सम्मिलित होने से इंकार करते हुए पक्ष विरोधी कथन दिए थे, जिसके आधार पर न्यायालय द्वारा एसडीओ आरईएस को बरी किया, विशेष न्यायालय ने माना कि गवाह झूठी गवाही दे रहा है। झूठी गवाही देने पर न्यायालय के समक्ष फरियादी जगन्नाथ दांगी के खिलाफ धारा 193,196 के तहत परिवाद पत्र प्रस्तुत किया गया। विचारण के दौरान न्यायालय ने अभियुक्त जगन्नाथ दांगी को एक वर्ष का सश्रम कारावास एवं एक हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया। प्रकरण में शासन की ओर से पैरवी सहायक निदेशक आलोेक श्रीवास्तव के मार्गदर्शन में अभियोजक अधिकारीगण ने की।