उत्तर प्रदेश में फर्जी रजिस्ट्रियों पर लगेगी रोक, 01 फरवरी से आधार सत्यापन अनिवार्य
लखनऊ, 29 जनवरी । उत्तर प्रदेश में ज़मीन खरीद के फर्जीवाड़े को रोकने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब आधार प्रमाणीकरण व्यवस्था को 01 फरवरी से लागू किया जा रहा है। इससे छद्म व्यक्तियों द्वारा की जाने वाली फर्जी रजिस्ट्रियों पर प्रभावी रोक लगेगी। इस संबंध में आवश्यक अधिसूचनाएं जारी की गई हैं। यह जानकारी उत्तर प्रदेश के स्टाम्प तथा पंजीयन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रवींद्र जायसवाल ने गुरुवार को विधान भवन में आयोजित प्रेसवार्ता में दी।
मंत्री जायसवाल ने बताया कि विलेख पंजीकरण के दौरान निष्पादकों, पक्षकारों एवं गवाहों की पहचान सत्यापन हेतु आधार प्रमाणीकरण व्यवस्था 01 फरवरी 2026 से प्रदेश के सभी उप निबंधक कार्यालयों में लागू कर दी जाएगी। इस संबंध में समस्त उप निबंधक कार्यालयों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। इसके अंतर्गत आधार संख्या धारकों की पहचान ई-केवाईसी, बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण एवं ई-हस्ताक्षर के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक रूप में स्थापित की जाएगी।
मंत्री ने बताया आधार आधारित बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण से छद्म व्यक्तियों द्वारा पंजीकरण पर प्रभावी रोक लगेगी, पंजीकरण प्रक्रिया में पारदर्शिता एवं विश्वसनीयता बढ़ेगी तथा भूमि एवं अचल संपत्ति से जुड़े फर्जीवाड़े, कूटरचित दस्तावेज और विवादों में उल्लेखनीय कमी आएगी। इससे डिजिटल पंजीकरण व्यवस्था सशक्त होगी, विधिक विवादों एवं न्यायालयीन वादों में कमी आएगी और नागरिकों के संपत्ति अधिकारों का संरक्षण सुनिश्चित होगा। यह व्यवस्था राज्य सरकार के डिजिटल गवर्नेंस लक्ष्यों के अनुरूप है।
डिजिटाइजेशन कार्य की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए दस्तावेजों का दो स्तर पर सत्यापन किया जा रहा है, जिससे कूटरचना और फर्जीवाड़े पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित हो सकेगा और भूमि से जुड़े रिकॉर्ड पूरी तरह सुरक्षित होंगे। इस अवसर पर महानिरीक्षक निबंधन नेहा शर्मा तथा विभाग अन्य उच्चाधिकारी उपस्थित रहे।