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मनरेगा को नई दिशा, 125 दिन रोजगार, पारदर्शिता और स्थायी विकास पर केंद्र का फोकस : सुरेश कश्यप

नाहन, 21 जनवरी । शिमला संसदीय क्षेत्र से सांसद सुरेश कश्यप ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) में केंद्र सरकार द्वारा किए गए सुधारों को ग्रामीण भारत के लिए एक महत्वपूर्ण और दूरदर्शी कदम बताया है। उन्होंने कहा कि मनरेगा ने वर्षों से ग्रामीण मजदूरों की आजीविका को सहारा दिया है । यह बात भाजपा के पूर्व अध्यक्ष एवं वर्तमान सांसद ने राजगढ़ में मिडिया से विशेष बातचीत के दौरान कही । कश्यप ने कहा कि मनरेगा में किए गए व्यापक सुधारों से यह योजना और अधिक प्रभावी, पारदर्शी और परिणामोन्मुखी बन गई है।

सांसद सुरेश कश्यप ने बताया कि वर्ष 2005 में नरेगा के रूप में शुरू की गई इस योजना को 2006 में देशभर में लागू किया गया था। वर्ष 2009 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का नाम जुड़ने के बाद यह योजना मनरेगा के नाम से जानी जाने लगी। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी “काम के बदले अनाज” जैसी योजनाएं देश में लागू रही हैं, जिनका उद्देश्य ग्रामीण और गरीब वर्ग को रोजगार उपलब्ध कराना था, लेकिन मनरेगा ने इस दिशा में एक मजबूत और कानूनी गारंटी वाला ढांचा प्रदान किया।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में मनरेगा को ग्रामीण आजीविका मिशन और ‘विकसित भारत’ के विजन से जोड़ते हुए आगे बढ़ाया जा रहा है। केंद्र सरकार का उद्देश्य है कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ें, पलायन रुके और मजदूरों को उनकी मेहनत का पूरा और समय पर पारिश्रमिक मिले। सुरेश कश्यप ने जानकारी दी कि पहले मनरेगा के तहत 100 दिन के रोजगार की गारंटी थी, जिसे अब बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है। इससे ग्रामीण मजदूरों को अधिक समय तक काम मिलेगा और उनकी आय में भी वृद्धि होगी। उन्होंने यह भी कहा कि मजदूरी भुगतान में होने वाली देरी को खत्म करने के लिए तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर ठोस कदम उठाए गए हैं।

उन्होंने बताया कि अब मनरेगा के अंतर्गत केवल अस्थायी कार्यों के बजाय ऐसे कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है, जिनसे गांवों में स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण हो सके। इनमें जल संरक्षण, सिंचाई योजनाएं, ग्रामीण सड़कें, तालाब, नालियां और अन्य आधारभूत ढांचे शामिल हैं। इन कार्यों से एक ओर रोजगार सृजित होगा, वहीं दूसरी ओर गांवों के दीर्घकालीन विकास को भी गति मिलेगी।

सांसद सुरेश कश्यप ने कहा कि मनरेगा में किए गए ये सुधार ग्रामीण मजदूरों के हित में हैं और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में एक मजबूत आधार प्रदान करते हैं। उन्होंने दोहराया कि केंद्र सरकार का संकल्प है कि मनरेगा का प्रभावी क्रियान्वयन हो, जिससे ग्रामीण भारत आत्मनिर्भर बने और मजदूरों को सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिल सके।

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