ग्रामीणों ने ठप किया केबीपीएल कंपनी का काम, सांसद ने आंदोलन की चेतावनी
रामगढ़, 22 जनवरी । जिले के वेस्ट बोकारो क्षेत्र में केबीपीएल कंपनी के खिलाफ ग्रामीणों का ग़ुस्सा फूटा है। नौकरी और मुआवजे की मांग को लेकर लोगों ने कंपनी का काम ठप कर दिया है। गुरुवार को कंपनी के कर्मचारी काम करने के लिए माइंस एरिया में घुसने का प्रयास कर रहे थे। लेकिन ग्रामीणों के उग्र प्रदर्शन के कारण काम शुरू नहीं हो पाया इस बार गुस्साए ग्रामीणों का नेतृत्व राज्यसभा सांसद खीरु महतो कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि परियोजना के नाम पर सीसीएल ने जमीन अधिग्रहण किया इसके बाद काम निजी कंपनी केबीपीएल को दे दिया। अब ग्रामीण मुआवजे और नौकरी के लिए तरस रहे हैं। वेस्ट बोकारो ओपी क्षेत्र के घाटों-चरही मार्ग पर करमटिया मोड़ के पास स्थित बसंतपुर परियोजना के प्रभावित ग्रामीणों ने रोजगार और उचित मुआवजे की मांग को लेकर बड़ा प्रदर्शन किया। इस आंदोलन में सैकड़ों की संख्या में महिलाएं, पुरुष और युवा शामिल हुए।
ढोल-नगाड़े के साथ सड़क पर उतरे सांसद
राज्यसभा सांसद खीरू महतो (जेडीयू) ने इन ग्रामीणों का नेतृत्व किया। लाेग कंपनी क विरोेध में ढोल-नगाड़ों के साथ सड़क पर उतरे। उनके साथ प्रदर्शनकारियों ने न सिर्फ नारे लगाए, बल्कि करीब सात घंटे तक सड़क को पूरी तरह जाम रखा। प्रदर्शन करने वाले ग्रामीणों का कहना है कि सीसीएल ने बसंतपुर परियोजना के लिए उनकी जमीन 30 से 35 साल पहले ही ले ली थी। उस समय कंपनी ने वादा किया था कि जमीन के बदले उचित मुआवजा और परिवार के सदस्यों को नौकरी दी जाएगी। लेकिन आज तक न तो पूरा मुआवजा मिला और न ही रोजगार। इन परियोजना से पांच गांव पूरी तरह प्रभावित हुए हैं। जमीन चली गई, खेती-बाड़ी चौपट हो गई, लेकिन दूसरी पीढ़ी भी खत्म होने को आई और सीसीएल की ओर से सिर्फ आश्वासन ही मिलते रहे। ग्रामीण बताते हैं कि उन्होंने कई बार लिखित आवेदन दिया और बैठक करने को कहा, लेकिन कंपनी प्रबंधन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। अब सब्र का बांध टूट चुका है।
वहीं प्रभावित ग्रामीणों ने कहा, हमारी जमीन पर आज सीसीएल की केबीपीपी (कोतरे-बसंतपुर-पचमो प्रोजेक्ट) भी चल रही है। कोयला निकल रहा है, कंपनी कमाई कर रही है, लेकिन हमें कुछ नहीं मिला। हमारे बच्चे बेरोजगार घूम रहे हैं। कंपनी सिर्फ कागजों पर वादे करती है, अमल कुछ नहीं करती है। मौके पर सांसद ने कहा कि यह सिर्फ कुछ लोगों का नहीं, बल्कि पूरे पांच गांवों का मुद्दा है। जमीन अधिग्रहण के बदले नौकरी और मुआवजा मिलना चाहिए। यह मामला 30 साल से ज्यादा समय से लंबित है। कंपनी ने कई बार लिखित में आश्वासन दिए, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। इसलिए लोग गुस्से में हैं।
सांसद ने चेतावनी देते हुए कहा कि बैठक में कोई हल नहीं निकला तो वे और सख्त कदम उठाएंगे। संपूर्ण केदला वाशरी का कोयला ढुलाई पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। बसंतपुर परियोजना के खिलाफ असहयोग आंदोलन शुरू होगा। उन्होंने कहा कि कंपनी का काम अब सिर्फ बातों से नहीं चलेगा।