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लोकतंत्र की मजबूती के लिए युवाओं की सक्रिय भागीदारी आवश्यक : यूथ फोरम झारखंड

रांची, 25 जनवरी। रांची प्रेस क्लब में रविवार को यूथ फोरम झारखंड के तत्वावधान में “यूथ, डेमोक्रेसी एंड आइडिया ऑफ इंडिया” विषय पर एक विचार-गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवाओं, छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों ने भाग लिया और लोकतंत्र, संविधान तथा आइडिया ऑफ इंडिया पर गंभीर विमर्श किया।

कार्यक्रम की शुरुआत यूथ फोरम झारखंड के अध्यक्ष कशिफुल इस्लाम के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने विषय की पृष्ठभूमि स्पष्ट करते हुए कहा कि आज युवाओं की राजनीतिक भागीदारी अक्सर केवल प्रतीकात्मक रूप से “झंडा उठाने” तक सीमित कर दी जाती है, जबकि लोकतंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक है कि युवा निर्णय-प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाएं, सवाल पूछें और अपनी बात मजबूती से रखें। उन्होंने कहा कि सचेत और प्रश्न करने वाले युवाओं के बिना लोकतंत्र जीवित नहीं रह सकता।

इसके बाद विभिन्न छात्र संगठनों और युवा सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अपने विचार साझा किए। वक्ताओं ने लोकतंत्र के समक्ष मौजूद चुनौतियों, बेरोज़गारी, शिक्षा व्यवस्था, भ्रामक सूचना (मिसइन्फॉर्मेशन) और नफ़रत की राजनीति जैसे मुद्दों पर चिंता व्यक्त की।

मुख्य वक्ता प्रो. मिथिलेश सिंह ने आइडिया ऑफ इंडिया पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत की पहचान किसी एक विचारधारा से नहीं, बल्कि उसकी विविधता, बहुलता और संवैधानिक मूल्यों से बनी है। उन्होंने कहा कि आइडिया ऑफ इंडिया को संकीर्ण दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि ऐतिहासिक और सामाजिक संदर्भों में समझने की आवश्यकता है।

रांची प्रेस क्लब के अध्यक्ष शंभू नाथ ने कहा कि “यूथ कोई उम्र नहीं, बल्कि एक सोच है।” उन्होंने युवाओं से प्रश्न करने की आदत विकसित करने की अपील करते हुए कहा कि लोकतंत्र सवालों से ही मजबूत होता है। वहीं अबू तलहा अब्दाल ने युवाओं के बीच बढ़ती हेट स्पीच और ब्लाइंड फॉलोइंग पर चिंता जताई और युवाओं से सक्रिय नागरिक बनने तथा संवैधानिक मूल्यों के साथ मजबूती से खड़े होने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में समर फिरदौस, अब्दुस सलाम, बिनय ओरांव, एस. अली, अवधेश कुमार और निशाद आलम ने भी अपने विचार रखे। वक्ताओं ने संगठनात्मक अनुभव और ज़मीनी सामाजिक कार्यों के आधार पर लोकतंत्र, समान नागरिकता, न्याय और युवाओं की जिम्मेदारियों पर प्रकाश डाला।

अध्यक्षीय भाषण में दिल्ली से आए अतिथि लईक़ अहमद खान ने कहा कि लोकतंत्र केवल चुनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सतत प्रक्रिया है, जिसमें आंदोलन, संवाद, सार्वजनिक बहस और संवैधानिक तरीकों से संस्थाओं को जवाबदेह बनाना आवश्यक है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब संस्थाएं कमजोर होती हैं, तो आइडिया ऑफ इंडिया भी खतरे में पड़ जाता है।

कार्यक्रम का संचालन नदीम खान ने किया, जबकि अंत में यूथ फोरम झारखंड के सचिव मोहम्मद रैहान ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

सेमिनार में बड़ी संख्या में छात्र, युवा, सामाजिक कार्यकर्ता और बुद्धिजीवी उपस्थित रहे। आयोजकों ने कहा कि इस तरह के वैचारिक संवाद आगे भी जारी रहेंगे, ताकि युवा केवल दर्शक न रहें, बल्कि लोकतंत्र के सक्रिय सहभागी बन सकें।————

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