हिसार : पूरे सैनिक सम्मान के साथ दी गई हवलदार दीपक गोयत को अंतिम विदाई
था। शहीद के अंतिम दर्शन के लिए ग्रामीणों और रिश्तेदारों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।
दीपक अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे। उनके पिता बलवान सिंह भी भारतीय सेना से सेवानिवृत्त
हैं। परिवार में उनकी पत्नी और तीन साल की दो नन्हीं जुड़वा बेटियां हैं, जिनके सिर
से पिता का साया उठ गया।
दीपक गोयत वर्ष 2016 में स्पोर्ट्स कोटा के तहत
कुश्ती खेल के माध्यम से भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। खेल के प्रति उनका जुनून और
अनुशासन ही उन्हें सेना तक ले गया। उनकी ड्यूटी जम्मू-कश्मीर के गूगलपुर, कुपवाड़ा
क्षेत्र में रही, जहां उन्होंने देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए कर्तव्य निभाया। शहीद
की अंतिम यात्रा पूरे सैन्य सम्मान के साथ निकाली गई। तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर
जब श्मशान घाट की ओर बढ़ा, तो लोगों ने फूल बरसाकर श्रद्धांजलि दी। सेना के जवानों
ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर अंतिम सलामी दी।