आर्थिक सर्वेक्षण भारत की मजबूत और संतुलित अर्थव्यवस्था का आईना : सिकंदर कुमार
शिमला, 30 जनवरी । भाजपा के राज्यसभा सांसद एवं प्रदेश महामंत्री डॉ. सिकंदर कुमार ने भारत सरकार द्वारा प्रस्तुत आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 को देश की आर्थिक मजबूती और स्थिर विकास का स्पष्ट संकेत बताया है। उन्होंने कहा कि यह सर्वेक्षण दिखाता है कि वैश्विक अनिश्चितताओं, भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक दबावों के बावजूद भारत लगातार मजबूती के साथ आगे बढ़ रहा है और दुनिया की सबसे तेज़ गति से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है।
डॉ. सिकंदर कुमार ने शुक्रवार को कहा कि आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि 2026-27 में यह 6.8 से 7.2 प्रतिशत के बीच रह सकती है। उन्होंने कहा कि यह केवल अल्पकालिक सुधार नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था में आए गहरे और दीर्घकालिक संरचनात्मक बदलावों का परिणाम है। भारत की आर्थिक वृद्धि का आधार संतुलित है, जहां एक ओर निजी उपभोग में लगभग 7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और यह जीडीपी का 61.5 प्रतिशत हिस्सा है, वहीं निवेश यानी सकल स्थायी पूंजी निर्माण में भी 7.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
उन्होंने कहा कि आम लोगों के लिए राहत की बात यह है कि अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच औसत उपभोक्ता मुद्रास्फीति केवल 1.7 प्रतिशत रही, जो अब तक के सबसे निचले स्तरों में से एक है। इससे लोगों की क्रय शक्ति बढ़ी है और बाजार में स्थिरता का माहौल बना है। सरकार के वित्तीय अनुशासन के चलते राजकोषीय घाटा भी लगातार कम हो रहा है और 2025-26 में इसके 4.4 प्रतिशत तक आने का अनुमान है। इसी तरह कर संग्रह में भी बढ़ोतरी हुई है और अप्रैल से दिसंबर 2025 के दौरान जीएसटी संग्रह 17.4 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। आयकर रिटर्न दाखिल करने वालों की संख्या में वृद्धि से अर्थव्यवस्था के औपचारिक होने का संकेत मिलता है।
डॉ. सिकंदर कुमार ने कहा कि बैंकिंग क्षेत्र की स्थिति पहले से कहीं बेहतर हुई है। सकल एनपीए घटकर 2.2 प्रतिशत और शुद्ध एनपीए 0.5 प्रतिशत रह गया है, जो कई दशकों में सबसे अच्छा स्तर माना जा रहा है। बैंक ऋण वृद्धि 14.5 प्रतिशत तक पहुंचने से उद्योग, व्यापार और आम नागरिकों को आर्थिक गतिविधियों के विस्तार में मदद मिल रही है। उन्होंने वित्तीय समावेशन की दिशा में हुई प्रगति का जिक्र करते हुए बताया कि देश में अब तक 55 करोड़ से अधिक जनधन खाते खोले जा चुके हैं और निवेशकों की संख्या 12 करोड़ के पार पहुंच गई है, जिनमें महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ी है।
उन्होंने कहा कि सेवा क्षेत्र आज भारत की अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा आधार बन चुका है और सकल मूल्य वर्धन में इसका योगदान 56 प्रतिशत से अधिक हो गया है। सेवाओं की वृद्धि दर लगभग 9 प्रतिशत रही है और भारत अब दुनिया का सातवां सबसे बड़ा सेवा निर्यातक बन गया है। औद्योगिक क्षेत्र में भी तेजी आई है और विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर 2025-26 की दूसरी तिमाही में 9 प्रतिशत से अधिक रही। उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना के तहत 14 क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निवेश हुआ है और लाखों नए रोजगार सृजित हुए हैं।
डॉ. सिकंदर कुमार ने कृषि क्षेत्र में आए बदलावों को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि बागवानी उत्पादन पहली बार खाद्यान्न उत्पादन से अधिक हुआ है, जो किसानों की आय बढ़ाने और कृषि के विविधीकरण की दिशा में बड़ा संकेत है। महिला श्रम शक्ति भागीदारी में आई बढ़ोतरी पर उन्होंने कहा कि यह दर 23.3 प्रतिशत से बढ़कर 41.7 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो महिला सशक्तिकरण का मजबूत प्रमाण है। कुल बेरोजगारी दर घटकर 4.8 प्रतिशत रहना भी रोजगार के मोर्चे पर सकारात्मक बदलाव को दर्शाता है।