विवाह का झांसा देकर दुष्कर्म प्रकरण में तत्काल प्राथमिकी दर्ज न करने पर विभागीय कार्रवाई के निर्देश
इस मामले में जिला न्यायालय से जारी आदेश के अनुसार पीड़िता ने 2 दिसंबर 2019 को हल्द्वानी थाना में शिकायत दी थी। मामले की प्रकृति को देखते हुए थाना बनभूलपुरा को तत्काल प्राथमिकी पंजीकृत करनी चाहिए थी, किन्तु इसे 4 जनवरी 2020 को दर्ज किया गया। न्यायालय ने इस देरी को दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 154 तथा सर्वोच्च न्यायालय द्वारा ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (2014) में निर्धारित दिशा-निर्देशों का उल्लंघन माना है, जिसके अनुसार लैंगिक अपराधों में प्राथमिकी का त्वरित पंजीकरण करना अनिवार्य है।
न्यायालय ने आदेश में कहा है कि नैनीताल के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक तत्कालीन थाना प्रभारी बनभूलपुरा के विरुद्ध विभागीय जांच प्रारंभ करें तथा उत्तराखंड पुलिस महानिदेशक ऐसे मामलों में बिना विलंब के प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देशों को दोहराते हुए प्रदेश के सभी थाना प्रभारियों को परिपत्र जारी करें। आदेश की प्रमाणित प्रति दोनों अधिकारियों को भेजे जाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
उल्लेखनीय है कि इस प्रकरण में दिल्ली निवासी मोहम्मद अकरमुल हक को न्यायालय पहले ही दोषसिद्ध कर चुका है। अभियोजन के अनुसार उसने वर्ष 2017-18 में एक वैवाहिक वेबसाइट के माध्यम से हल्द्वानी की 23 वर्षीय युवती से संपर्क कर स्वयं को अविवाहित बताया था और विवाह का झांसा देकर उसे हल्द्वानी, दिल्ली और नोएडा के विभिन्न होटलों में ले जाकर जबरन शारीरिक संबंध बनाए। विवाह से मुकरने पर पीड़िता ने 2 दिसंबर 2019 को थाना बनभूलपुरा में प्राथमिकी दी। जांच में अभियुक्त की पहचान स्पष्ट होने पर उसे दिल्ली से गिरफ्तार किया गया और बाद में न्यायालय ने उसे दस वर्ष का सश्रम कारावास तथा पचास हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई, अर्थदंड न देने पर छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतने का आदेश दिया है।