फोरेंसिक विज्ञान संस्थान की स्थापना के लिए क्या कदम उठाए जा रहे-हाईकोर्ट
सुनवाई के दौरान न्यायमित्र अधिवक्ता पंकज गुप्ता ने अदालत को बताया कि नए आपराधिक कानून में मुकदमें के त्वरित निस्तारण के प्रावधान किए गए हैं। वहीं पॉक्सो अपराध में नमूनों की जांच रिपोर्ट निर्धारित समय में जारी करना निर्धारित किया गया है। इसी तरह सात साल से अधिक के सजा वाले अपराधों में फोरेंसिक जांच जरूरी की गई है। ऐसे में आने वाले समय में विधि विज्ञान प्रयोगशाला में प्रकरणों का भार बढ़ने वाला है। इसके बावजूद इनमें पर्याप्त संसाधन और कार्मिक नहीं है। वहीं राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता मनोज शर्मा ने बताया कि अहमदाबाद में नेशनल फोरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी की स्थापना की गई है। जिसके अंतर्गत राज्यों में संस्थान स्थापित किए जाने जरूरी है, ताकि फोरेंसिक प्रयोगशालाओं के लिए पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित कर्मचारी उपलब्ध हो सके। इस पर अदालत ने कहा कि अब वक्त आ गया है कि फोरेंसिक प्रयोगशाला में हर जरूरी सुविधाएं हो। ऐसे में राज्य सरकार बताए कि प्रदेश में संस्थान की स्थापना के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। गौरतलब है कि प्रदेश की विधि विज्ञान प्रयोगशाला में लंबित प्रकरणों और जांच रिपोर्ट देरी से जारी करने पर गंभीरता जताते हुए अदालत ने पूर्व में स्वप्रेरणा से प्रसंज्ञान लिया था।