इंडिया गेट के नौ प्रदर्शनकारियों को बीस-बीस हजार रुपये के मुचलके पर मिली जमानत
सुनवाई के दौरान आरोपितों की ओर से पेश वकील ने कहा कि आरोपितों का किसी भी प्रतिबंधित संगठन से कोई संबंध नहीं है और पुलिस के आरोप भ्रमपूर्ण और झूठे हैं। उन्होंने कहा कि नारे सत्ता के खिलाफ हो सकते हैं, लेकिन ये हिरासत का आधार नहीं हो सकते हैं। इसका फैसला ट्रायल में ही किया जा सकता है।
दिल्ली पुलिस ने इस मामले में 17 लोगों को गिरफ्तार किया था। पुलिस के मुताबिक इन आरोपितों ने वायु प्रदूषण के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए दस पुलिसकर्मियों पर मिर्च का स्प्रे फेंका। पुलिस इन आरोपितों के नक्सलियों से संबंध होने की पड़ताल कर रही है। पुलिस के मुताबिक इन प्रदर्शनकारियों ने नक्सलियों के समर्थन में नारे लगाए थे। पुलिस के मुताबिक इन प्रदर्शनकारियों ने माओवादी कमांडर माडवी हिडमा के समर्थन में नारे लगाए जो 76 सीआरपीएफ के जवानों की हत्या के लिए जिम्मेदार था। दिल्ली पुलिस के मुताबिक कुछ प्रदर्शनकारियों ने 9 नवंबर को मान सिंह रोड को जाम कर दिया था जिसके बाद उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता के संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की थी।
दिल्ली पुलिस के मुताबिक रेडिकल स्टूडेंट यूनियन एक प्रतिबंधित संगठन है। आरोपितों ने सोशल मीडिया पर इस संगठन की प्रशंसा की थी।
इंडिया गेट पर प्रदर्शन के मामले में 17 लोगों को गिरफ्तार किया गया था, जबकि कर्तव्य पथ पर प्रदर्शन करने के मामले में छह लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। कर्तव्य पथ पर प्रदर्शन करने वाले छात्र दिल्ली यूनिवर्सिटी के थे, जो भगत सिंह छात्र एकता मंच और हिमखंड नामक संगठन से जुड़े हुए थे। कुछ आरोपितों की जमानत याचिका पर कल यानि 29 नवंबर को भी सुनवाई होनी है।