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राष्ट्रीय एकता दिवस पर विधान सभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी का लौहपुरूष को नमन

देवनानी ने कहा कि सरदार पटेल केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि भारत की अखंडता और स्वाभिमान के प्रतीक हैं। उन्होंने अपने कर्म, विचार और राष्ट्रनिष्ठा से यह सिद्ध किया कि जब देशहित सर्वोपरि हो, तब कोई भी कठिनाई असंभव नहीं रहती। उनके नेतृत्व में 562 रियासतों का भारतीय संघ में विलय कर एक सशक्त, संगठित और एकीकृत भारत की नींव रखी गई यह उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।

देवनानी ने कहा कि आज जब देश विकसित भारत की दिशा में अग्रसर है, तब हर नागरिक का कर्तव्य है कि वह सरदार पटेल के आदर्शों से प्रेरणा लेकर राष्ट्र की एकता, अखंडता और समरसता को सर्वोच्च मान बनाए रखे। विधान सभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी ने युवाओं से आह्वान किया कि वे सरदार पटेल के जीवन से राष्ट्रसेवा, अनुशासन, निष्ठा और दृढ़ निश्चय की प्रेरणा लेकर देश के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएँ।

देवनानी ने कहा राष्ट्र की एकता ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है, और इस शक्ति की जड़ों में सरदार पटेल जैसे महापुरुषों का त्याग, तप और नेतृत्व आज भी जीवंत है। उन्होंने सभी प्रदेशवासियों से आग्रह किया कि राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर हम सब यह संकल्प लें कि भारत की एकता, सुरक्षा और गरिमा की रक्षा में सदैव समर्पित रहेंगे।

देवनानी ने पुष्कर मेले के शुभारंभ पर बधाई दी

राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने पुष्कर मेले के शुभारंभ के अवसर पर लोगों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।

देवनानी ने कहा कि यह भव्य मेला राजस्थान की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और लोक जीवन का अद्भुत संगम है, जो प्रदेश की आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक समृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

उन्होंने कहा कि पुष्कर मेला न केवल राजस्थान की पहचान है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति की वैश्विक छवि को भी सशक्त बनाता है। इस मेले में आये पशुपालकों, व्यापारियों एवं पर्यटकों का तीर्थराज पुष्कर की पावन धरा पर स्वागत है।

देवनानी ने कामना की कि यह आयोजन लोक परंपराओं, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक पर्यटन को नई ऊँचाइयों तक ले जायेगा।

देवनानी ने गोपाष्‍टमी पर दी शुभकामनाएं

राजस्‍थान विधान सभा अध्‍यक्ष वासुदेव देवनानी ने गोपाष्‍टमी के पावन पर्व पर प्रदेशवासियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी है। उन्‍होनें कहा कि गोपाष्‍टमी का पर्व गौ-संवर्द्धन, सेवा और संरक्षण के प्रति हमारी आस्‍था एवं समपर्ण का प्रतीक है। भारतीय सनातन एवं संस्‍कृति में गौमाता का स्‍थान अत्‍यंत पूजनीय है, जिनके प्रति सेवा और सम्‍मान का भाव रखना हमारे जीवन मूल्‍यों का अभिन्‍न हिस्‍सा है।

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