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सब के बलकवा के दिहा, छठी मईया ममता-दुलार…

मंगलवार तड़के से ही छठ पूजा आयोजन स्थल व घाटों पर श्रद्धालु परिवार के साथ टोकरे में ठेकुआ, फल, गन्ने, पूजा सामग्री आदि लेकर पहुंचीं। सूर्याेदय के समय से कुछ पहले ही व्रतधारियों ने जल में खड़े होकर छठ मैया की आराधना शुरू कर दी। उगते सूर्य देव की पहली किरण के साथ ही छठ मैया का जयघोष होने लगा व अर्घ्य देना प्रारंभ हो गया। भक्तजन काफी देर तक घाटों पर भजन कीर्तन करते रहे। इस दौरान महानगर में छठ पूजा का आयोजन सीएल गुप्ता आई हॉस्पिटल के पास रामगंगा नदी घाट, सम्राट अशोक नगर अमृत सरोवर, लाइनपार आदर्श नगर, कपूर कंपनी प्राचीन शिव मंदिर, डीपी यादव चौराहा छठ मइया पार्क, रेलवे हरथला कॉलोनी आरपीएफ मैदान आदि स्थानों पर दोपहर 2 बजे से पूर्वांचल वासी पहुंचने शुरू हो गए। श्रद्धालुओं ने टोकरी छाज और छबड़ों में (इन्हें दउरा भी कहते हैं, यहां बांस के बने होते हैं) ठेकुआ, चावल, फल, गोला, नारियाल, अननास, सेब, गन्ना, नीबू, कंदमूल फल, हल्दी, केले पकवान सहित काफी सामान लेकर घाट पर पहुंचे। व्रती महिलाओं ने परिवार की अन्य सदस्यों के साथ घाट पर माता की आराधना शुरू कर दी। सूर्यास्त का समय जैसे-जैसे नजदीक आता गया श्रद्धालु भक्तिमय माहौल में डूबते गए। सूर्यास्त नजदीक आने तक श्रद्धालुओं की निगाहें भगवान सूर्य की ओर टिक गईं। व्रतियों ने नदी में खड़े होकर छठ मां और सूर्यदेव की आराधना की। सूर्यास्त आरंभ होते ही श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से सराबोर होकर अर्घ्य देना आरंभ कर दिया।

इसके अलावा जिलें में 10 से अधिक स्थानों पर छठ पूजा के सामूहिक कार्यक्रम सम्पंन हो रहे थे। लोकोशेड स्थित नगर घाट, अमृत सरोवर, रामंगगा नदी घाट रामगंगा विहार, रामगंगा नदी लालबाग, गांगन नदी, चटटा पुल पर छठ पूजा के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी। जहां पर सोमवार शाम को डूबते हुए सूर्य देवता को अर्घ्य दिया गया। इसके आलावा घरों की छतों पर, पार्कों में अस्थाई तलाब बनाकर आज उगते हुए सूर्य भगवान को अर्घ्य दिया गया।

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