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रिश्वत मामले में आरोपित चिकित्सक और सहयोगी को जमानत नहीं

पीठासीन अधिकारी सुरेन्द्र कुमार ने अपने आदेष में कहा कि मौजूदा समय में लोक सेवकों की ओर से कार्य करने में कमीशनखोरी की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। इस प्रवृत्ति पर अंकुश लगाना जरूरी है, ताकि आमजन के कार्य सुगमता से हो सकें और लोक सेवकों में भ्रष्टाचार के अपराध को लेकर भय पैदा हो। आरोपित चिकित्सक पर लोक कार्य की एवज में एक लाख रुपये की राशि राशि प्राप्त कर सह आरोपित जगत सिंह से मिलीभगत कर ट्रेप टीम के आने पर खुद को बचाने के लिए राशि के लिफाफे को खुर्द-बुर्द करने का प्रथम दृष्टया अपराध करना सामने आया है। इसके अलावा फिलहाल मामले में अनुसंधान विचाराधीन है। ऐसे में आरोपितों को जमानत का लाभ नहीं किया जा सकता। जमानत अर्जी में कहा गया कि आरोपित चिकित्सक के पास परिवादी का कोई काम पेंडिंग नहीं था। बिल राशि भुगतान के लिए अस्पताल की एक कमेटी बना रखी है। उसने परिवादी से रकम के लिए कोई मांग नहीं की है। एसीबी में शिकायत दर्ज कराने तक वह उससे मिला नहीं था, उसे जमानत दी जाए। जिसका विरोध करते हुए विशेष लोक अभियोजक शालिनी गौतम ने कहा कि आरोपी को रिश्वत राशि के साथ पकडा गया है। इसके अलावा अभियोजन के पास आरोपितों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य हैं। ऐसे में उन्हें जमानत नहीं दी जाए। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अदालत ने आरोपितों की जमानत अर्जी को खारिज कर दिया।

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