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शिक्षा में रंगमंच का महत्व: गांधारी का श्राप- पांचाली की शपथ नाटकाें का मंचन

गांधारी जब अपने मृत पुत्रों को देखती हैं तो वह कृष्ण को श्राप देती है वह कहती है कि वह पड़ा कंकाल मेरे पुत्र का….तुमने किया है यह कृष्ण सब कुछ तुमने किया है। इस तरह से कृष्ण को श्रापित करती है और कहती है कि तुम्हारा वंश भी इसी तरह से खत्म हो जाएगा और एक दिन तुम भी घने जंगलों में एक व्याध के हाथों मारे जाओगे । इसी के साथ पांचाली की शपथ नाटक में जब पंचाली को चौसर क्रिया में हार दिया जाता है तो पांचाली प्रण लेती है कि जब तक दुशासन का रक्त उसके सामने नहीं रखा जाएगा और वह अपने बालों को उसे रक्त से नहीं धोएगी तब तक कि वह अपने बाल नहीं बांधेगी। अतः कौरवों से वह इस प्रकार का शपथ लेती है।

स्कूल के सभी छात्रों ने इन प्रस्तुतियों का भरपूर आनंद लिया। विशेषकर लोक शैली छाऊ नृत्य के माध्यम से इन प्रस्तुतियों की सराहना की । नाट्य मंचन में इस विद्यालय की अध्यापक मौजूद थे। इस अवसर पर गोविंद यादव द्वारा छाऊ नृत्य प्रशिक्षण व प्रस्तुति निर्देशन सीमा शर्मा द्वारा किया गया।

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