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Delhi

“स्त्री प्रणेता जनक नंदनी सीता“ पर संगोष्ठी का आयोजन

संगोष्ठी में जहां मां जानकी के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई, वहीं सभी वक्ताओं ने भारतीय परिवार, समाज और संस्कृति में पाश्चात्य सभ्यता का युवाओं पर बढ़ते प्रभाव पर चिंता जताई और इसके दूरगामी परिणाम को भारत और भारत की संस्कृति के लिए घातक माना।

संत समिति के धर्म विभाग के अखिल भारतीय अध्यक्ष आचार्य शुभेष श्रमण ने विषय प्रस्तुति दी। विश्व मांगल्य सभा की सह संगठन मंत्री पूजा जी देशमुख ने सीता के व्यक्तित्व और उपलब्धियों की समकालीन प्रासंगिकता को रेखांकित किया। मुख्य वक्ता साध्वी समाहिता ने बेटियों से रावण की पहचान रखने की सलाह दी। इसके साथ ही धर्म परिवर्तन और जिहाद पर रोक थाम के लिए उचित कानून लाने और कठोर करवाई की बात कही।

नरेंद्र ठाकुर ने कहा कि अपने बच्चों को भारतीय संस्कृति संस्कारों की शिक्षा देना अत्यंत अवश्य हो गया है। परिवार में रामायण और वैदिक ग्रंथो का अध्ययन करवाना से ही बच्चों को संस्कारित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि कोई भी बच्चा सपने अपनी भाषा में देखता है इसलिए अगर आप परिवार में बोलचाल की भाषा अंग्रेजी रखेंगे तो बच्चों के भविष्य का सपना दिशाहीन हो जाएगा। इसलिए सीता से संयमित संवाद और अनुशासन सीखने की जरूरत है।

केंद्रीय मंत्री एसपी सिंह बघेल ने सीता से शक्ति तक और स्त्री सम्मान और राष्ट्र निर्माण पर केंद्रित विषय पर अपना विचार व्यक्त करते हुए कहा कि समाज में भारतीयता बचाए रखने और युवा वर्ग में स्वचेतना जागृत करने के लिए इस तरह के कार्यक्रम होते रहने चाहिए।

अखिल भारतीय संत समिति के महासचिव स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि वैदिक काल से ही भारत की स्त्रियां वैचारिक रूप से कितनी स्वतंत्र थीं, इसको हम माता सीता के चरित्र में साफ देश सकते हैं। हमें ऐसा लगता कि रामायण में राम केंद्रित है, लेकिन वास्तव में रामायण की पूरी गाथा सीता केंद्रित है। इसमें राम अगर शरीर है तो सीता आत्मा और अगर आत्मा निकल जाए तो शरीर का कोई मूल्य नहीं रह जाता है। आज के बदलते परिवेश में हमें आज की अपनी सीताओं को बचाना हाेगा। अगर अभी हम सचेत नहीं होंगे तो आने वाले समय में ना जाने कितने रावण खेड़े होंगे।

इसके अलावा अन्य वक्ताओं ने माता जानकी के जीवन दर्शन से आज के सन्दर्भ में सीखने की आवश्यकता पर जोर दिया। सामाजिक राजनीतिक धार्मिक सभी पक्षों में सर्तकता की आवश्यकता बताई और युगों को सलाह दी कि माता जानकी का हरण सिर्फ इसलिए हुआ क्योंकि रावण भेष बदल कर आया।

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