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Chhattisgarh

जिंदल पावर लिमिटेड की प्रस्तावित कोयला खदान के विरोध में ग्रामसभा का निर्णय, जनसुनवाई निरस्त करने की मांग

16 सितंबर को ग्राम पंचायत भवन झरना में विधिवत ग्राम सभा आयोजित की गई। इस बैठक में पंचायत क्षेत्र के सभी पात्र सदस्य, महिला-पुरुष ग्रामीण, परंपरागत पंच, जनप्रतिनिधि एवं पंचायत पदाधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित हुए। परियोजना पर गहन विचार-विमर्श के उपरांत ग्राम सभा ने सर्वसम्मति से प्रस्तावित परियोजना का विरोध करते हुए आपत्ति प्रस्ताव पारित किया।

ग्राम सभा का मानना है कि प्रस्तावित परियोजना से ग्रामीण जीवन, आजीविका, पर्यावरण और सामाजिक-सांस्कृतिक संरचना पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। ग्रामवासियाें का कहना है कि ग्राम झरना की भूमि कृषि प्रधान है। यही किसानों और ग्रामीणों की आजीविका का प्रमुख आधार है। कोयला खदान की स्थापना से वे अपनी भूमि, जलस्रोत और वनों से वंचित हो जाएंगे। परियोजना से वायु, जल एवं मिट्टी प्रदूषण की समस्या बढ़ेगी, जिससे ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा क्षेत्र के परंपरागत जल स्रोत, नदी-नाले एवं भूमिगत जल पहले से ही औद्योगिक गतिविधियों से प्रभावित हैं। नई खदान से जल संकट और बढ़ेगा । प्रस्तावित परियोजना ग्रामीणों की संस्कृति, परंपरागत जीवनशैली और पर्यावरण को नष्ट करेगी।

ज्ञापन में कहा गया है कि ग्राम झरना में जिंदल पावर लिमिटेड की स्थापना को किसी भी स्तर पर पर्यावरणीय स्वीकृति न दी जाए। ग्राम सभा झरना का यह आपत्ति प्रस्ताव विधिसम्मत मान्यता प्राप्त कर रिकॉर्ड में दर्ज किया जाए। इस प्रस्ताव की प्रति माननीय न्यायालय एवं संबद्ध प्राधिकरणों के समक्ष प्रस्तुत करने योग्य प्रमाणित दस्तावेज़ माना जाए। यह निर्णय संविधान की पाँचवी अनुसूची, पेसा अधिनियम 1996 एवं छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम के अनुरूप विधिवत आयोजित ग्राम सभा में लिया गया है। ग्राम सभा को अपने क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और प्रबंधन का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है।

ग्राम सभा झरना की सर्वसम्मत आपत्ति का सम्मान करते हुए प्रस्तावित जनसुनवाई को निरस्त किया जाए एवं परियोजना को किसी भी प्रकार की पर्यावरणीय स्वीकृति प्रदान न की जाए। इससे ग्रामीणों की भावनाओं, आजीविका और संवैधानिक अधिकारों का संरक्षण सुनिश्चित होगा।

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