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Himachal Pradesh

भाषा एवं संस्कृति विभाग ने हिंदी भाषा पर आयाेजित की परिचर्चा एवं कवि सम्मेलन

इस अवसर पर हिंदी भाषा के महत्व एवं संभावनाओं पर साहित्यकार मुरारी शर्मा ने पत्रवाचन किया। उन्होंने कहा कि हमारे मनोभावों की अभिव्यक्ति सदैव संवाद के जरिए होती है और उसके लिए जरूरी है भाषा…। हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है तो प्रांतीय भाषाएं हमारा गौरव है, हमारी भाषाएं देश की संस्कृति और संस्कारों की प्रतिबिंब है।

उन्होंने कहा कि भाषाएं केवल शब्दों का सागर नहीं, वरन संस्कृति, इतिहास और पहचान का जीवंत दस्तावेज है। वहीं पर रिसर्च स्कॉलर भोपाल सिंह ने बताया कि हिंदी शब्द की उत्पति सिंधु नदी क्षेत्र से हुई है, जिसे इरानी लोग सिंह के बजाय हिंद कहकर पुकारते थे। वहीं पर डा. मनोहर अनमोल ने कहा कि हिंदी भाषा के उत्थान को लेकर अभी काम करने की बहुत ज़रूरत है। जबकि जिला भाषा अधिकारी रेवती सैनी ने कहा कि हिंदी विश्व की तीसरी सबसे बड़ी बोली जाने वाली भाषा है। यह हमारे लिए गौरव की बात है, अंग्रेजी के आगे हमें हीन भावना रखने की जरूरत नहीं है। हिंदी संपर्क भाषा के रूप में हर जगह अपनी पैठ बनाए हुए है। इस अवसर पर आयोजित कवि सम्मेलन में करीब चालीस कवियों न अपनी-अपनी कविताओं का पाठ किया।

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