उज्जैन: बेगमबाग में फिर चला बुलडोजर, दो मकान धराशायी
बेगमबाग मार्ग पर विकास प्राधिकरण की कई संपत्तियों की लीज 1980 से जमा नहीं की गई थी। कुछ लोगों ने लीज का नवीनीकरण नहीं कराया और शर्तों का उल्लंघन कर होटल, रेस्टोरेंट बना लिए। प्राधिकरण ने करीब दो साल पहले 28 संपत्ति धारकों को नोटिस दिए थे। अधिकांश मकान मालिकों ने प्राधिकरण के नोटिस को न्यायालय में चुनौती दी थी, लेकिन उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय दोनों ने ही विकास प्राधिकरण के पक्ष में फैसला सुनाया। अब न्यायालय से अंतिम आदेश आने के बाद कार्रवाई तेज की गई है। शुक्रवार सुबह हुई कार्रवाई भूखंड क्रमांक-19 पर की गई। प्रशासन द्वारा अब तक 12 मकानों पर कार्रवाई हो चुकी हैं। उज्जैन विकास प्राधिकरण अब तक तीन बार कार्रवाई कर चुका है। कार्रवाई के दौरान किसी तरह की गड़बड़ी न हो, इसके लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। कार्रवाई के दौरान यूडीए सीईओ संदीप सोनी, नगर निगम अपर आयुक्त संतोष टैगोर, एसडीएम एलएन गर्ग, एएसपी नितेश भागर्व सहित तहसीलदार, पटवारी मौजूद रहे।
दो बार पहले भी हो चुकी है कार्रवाई
विकास प्राधिकरण 23 मई और 11 जून को बेगमबाग क्षेत्र में मकान तोडऩे की कार्रवाई कर चुका है। 23 मई को यहां दो प्लॉटों पर बने पांच मकान तोड़े गए थे। यूडीए ने 11 जून को बेगमबाग मार्ग पर स्थित भूखंड नंबर 20, 30, 59 और 64 पर बने 7 मकान को तोड़ा था। इन सभी मकानों में भी लीज शर्तों का उल्लंघन कर दुकानें-होटल संचालित की जा रही थी।
स्थगन समाप्त होते ही कार्रवाई
वर्ष 1985 में उज्जैन विकास प्राधिकरण ने बेगमबाग क्षेत्र में 40 बॉय 60 के 30 प्लॉट लोगों को लीज पर दिए थे। लगभग सभी मकानों की लीज 2015 या इसके पहले समाप्त हो चुकी है। मकान मालिकों ने द्वारा भूखण्ड को अलग-अलग हिस्सों में बांट कर उन पर भवन बनाए और उनका व्यावसायिक उपयोग करने लगे थे। महाकाल मंदिर जाने के लिए यह प्रमुख मार्ग है। प्रशासन की मंशा है कि सिंहस्थ के पहले इस मार्ग को चौड़ा किया जाए।
यहीं कारण है कि कोर्ट का स्थगन समाप्त होते ही यूडीए मकानों को तोडऩे की कार्रवाई कर रहा है।
इनका कहना है….
यूडीए की कई संपत्तियों की लीज 1980 से जमा नहीं की गई और कुछ लोगों ने नवीनीकरण नहीं कराया था। लीज शर्तों का उल्लंघन कर होटल, रेस्टोरेंट बना लिए। दो साल पहले 28 संपत्ति धारकों को नोटिस दिए थे। न्यायालय का स्थगन आदेश हटते ही शुक्रवार को कार्रवाई की गई।
संदीप सोनी, सीईओ, उज्जैन विकास प्राधिकरण