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प्रकाश जैन ने साहित्यिक पत्रकारिता के मानदंड स्थापित किए – प्रो. श्रोत्रिय

स्व प्रकाश जैन की जन्मशती के अवसर पर सूचना केंद्र में आयोजित कार्यक्रम में अध्यक्षता करते हुए उन्होंने कहा कि प्रकाश जैन बड़े नामों से प्रभावित नहीं होते थे। वे स्थापित रचनाकारों की कमजोर रचनाएं अस्वीकृत करने में नहीं हिचकिचाते थे। उन्होंने “लहर” को देश की श्रेष्ठ साहित्यिक पत्रिका बनाने में मनमोहिनी जी के साथ मिलकर गहरा संघर्ष किया और संपूर्ण जीवन इसी में लगाया। एक कवि के रूप में वे छोटी कविताओं के बड़े कवि थे। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि साहित्यकार व पूर्व आई ए एस हेमंत शेष ने कहा कि प्रकाश जैन ने अपने लहू से नई पीढ़ी को सींचा। “लहर” पत्रिका एक ऐसा मंच थी जहां युवा रचनाकार अपनी प्रतिभा के बल पर छप सकता था। देश के अनेक जाने माने लेखकों की शुरुआत “लहर” पत्रिका से हुई।”लहर” में छपना साहित्यकार होने के प्रमाणपत्र समान माना जाता था।उन्होंने कहा कि प्रकाश जैन एक बेहतरीन कवि थे, वे लहर के संपादक न होते तो कवि के रूप में जाने जाते।

जन्मशती समारोह में स्व प्रकाश जैन की कविताओं के संग्रह “अंतर्यात्रा _2” का लोकार्पण किया गया। संग्रह के विषय में कवि रासबिहारी गौड़ ने बताया कि प्रकाश जैन की कविताएं मनुष्य की चेतना को सशक्त बनाने वाली हैं। जीवन के अवसाद,निराशा,विडंबना के बीच भी वे टूटने के स्थान पर मजबूत होने का आग्रह रखते हैं। संग्रह के संपादक के रूप में संगीत जैन ने सुरुचिपूर्ण रूप से अपने पिता की स्मृति को ताजा किया है। इस अवसर पर प्रकाश जैन के भ्राता महावीरमल लोढ़ा ने कहा कि वे व्यक्ति नहीं युगपुरुष थे । कल्पना भंडारी, सुधीर जैन ने भी अपने विचार व्यक्त किए। डॉ नवल भाभडा ने लहर और प्रकाश जैन पर कविता पढ़ी।

कार्यक्रम के प्रारंभ में कालिंदनंदिनी शर्मा ने प्रकाश जैन का परिचय प्रस्तुत किया। संगीत जैन ने आभार ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ अनंत भटनागर ने किया। कार्यक्रम में नगर के प्रमुख साहित्यकार डॉ चंद्रप्रकाश देवल, गोपाल माथुर,उमेश चौरसिया, सत्यकिशोर सक्सेना, डॉ रमेश अग्रवाल, राधावल्लभ शर्मा, सुरेश सिंधी, सुरेश अग्रवाल ,इंदिरा पंचोली, श्रुति गौतम,पूनम पांडे, पायल गुप्ता, प्रतिभा जोशी,कविता अग्रवाल, हिमांशु जैन सहित गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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