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बलिया बलिदान दिवस की स्मृति में निकला जुलूस

जनप्रतिनिधियाें और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से कुंवर सिंह चौराहे से आगे लोक निर्माण विभाग के डाकबंगले तक ही रुक जाने को लेकर शहर में तरह-तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया। जबकि परंपरा रही है कि जिला कारागार का फाटक सांकेतिक रूप से खुलने के बाद शासन और प्रशासन के वरिष्ठ लोगों के अलावा सेनानियों के परिजनों समेत हजारों लोग जुलूस की शक्ल में कुंवर सिंह चौराहा, टीडी कालेज चौराहा, चित्तू पाण्डेय चौराहा होते हुए क्रांति मैदान टाउन हाल पहुंचते थे। लेकिन इस बार टाउन हाल के बजाए कलेक्ट्रेट स्थित गंगा बहुद्देशीय सभागार में मुख्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

जनप्रतिनिधियाें और वरिष्ठ अधिकारी वहां तक भी पैदल नहीं गए। सेनानी रामदहिन ओझा, जिनकी प्रतिमा टीडी काॅलेज चौराहे पर लगी है, के पौत्र डा. प्रभात ओझा ने कहा कि बेहतर होता कि मंत्री और अफसर परंपरा का निर्वाह करते। लेकिन आम लोगों और सेनानी परिवारों को इस परम्परा को आगे बढ़ाना होगा।

वहीं, चित्तू पाण्डेय जो कि सन् 1942 की अगस्त क्रांति के अगुआ थे और अंग्रेजी हुकूमत के कलेक्टर जे निगम को हटाकर खुद ही बलिया की कमान संभाल ली थी, उनके प्रपौत्र विनय पाण्डेय ने भी मंत्रियों और डीएम के कुंवर सिंह चौराहा से आगे अन्य सेनानियों की प्रतिमाओं तक न जाने पर क्षोभ व्यक्त किया।

बहरहाल, जिला कारागार से जुलूस निकलने के बाद गंगा बहुद्देशीय सभागार में 1942 की अगस्त क्रांति में शहीदों के परिजनों और उसके बाद युद्ध में शहीद हुए सैनिकों की विधवाओं को समारोहपूर्वक सम्मानित किया गया। जहां प्रभारी मंत्री दयाशंकर मिश्र दयालु, परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह, अल्पसंख्यक मंत्री दानिश आजाद अंसारी, डीएम मंगला प्रसाद सिंह व एसपी ओमवीर सिंह आदि मौजूद थे।

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