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काशी की सामूहिक शादी में दूल्हा-दुल्हन के लिए रोटी का संकट, ढाबे में कराया नाश्ता!

वाराणसी के हरहुआ के कृषक इंटर कॉलेज के मैदान में आयोजित सामूहिक विवाह समारोह में हुई अव्यवस्थाओं ने मेहमानों को बेहद निराश किया। शादी के दिन परिवारों ने अपने मेहमानों को भोजन देने की उम्मीद जताई थी, परंतु खाने के स्टॉल पर मची अफरातफरी के कारण बहुत से लोगों को खाना ही नहीं मिल सका। दलित परिवार की कलावती ने कहा कि उनके बेटे की शादी थी, लेकिन आयोजनों की शान के बावजूद इज्जत की रक्षा नहीं हो सकी। उन्हें रिश्तेदारों से आंखें मिलाने में दिक्कत आ रही है, क्योंकि उन्होंने घर लौटकर अपने मेहमानों के लिए चूल्हा जलाना पड़ा। इस शादी में कुल 193 जोड़ों ने एक साथ शादी की, जिसमें प्रत्येक दुल्हा-दुल्हन के पास 20-20 कूपन थे। ऐसे में खाने की व्यवस्था का अनुमान 4200 लोगों के लिए था, लेकिन सच तो यह था कि केवल 1500 से 2000 लोगों के लिए ही खाना तैयार किया गया था।

प्रशासन की गलती का ताजा उदाहरण तब देखने को मिला जब मंत्री और विधायकों को भी कार्यक्रम में उचित भोजन नहीं मिला। अधिकारियों ने यह दावा किया कि आसपास के गांवों के लोग समारोह में घुस आए थे, जिसके कारण अव्यवस्था का सामना करना पड़ा। लेकिन क्या यह तर्क सही है? मेहमानों का सही हिसाब नहीं रखा गया था, जो इस घटनाक्रम की गंभीरता को और बढ़ाता है। स्थिति यह थी कि दूल्हा-दुल्हन को भी सिर्फ नमक-रोटी पर गुजारा करना पड़ा और घर लौटकर उनके परिजनों ने चूल्हा जलाने पर मजबूर हो गए।

इन आयोजनों की प्रकृति पर सवाल उठाते हुए शादी में शामिल मेहमान जियालाल ने बताया कि उन्होंने एवं रिश्तेदारों ने खुद मार्केट में जाकर नाश्ता कराया, क्योंकि उनके पास मिले भोजन कूपन का कोई उपयोग नहीं हुआ। शिवपूजन, जिनकी शादी भी इस समारोह में हुई थी, ने कहा कि “हमें कुछ भी नहीं मिला। खाने की व्यवस्था बिल्कुल अस्त-व्यस्त थी।” ऐसे में प्रशासन की व्यवस्था पर यकीन करना मुश्किल हो गया है। इस समारोह का कुप्रबंधन इतना गंभीर है कि यह मुख्यमंत्री के कार्यालय तक पहुंच गया है, और लापरवाही की जांच के लिए रिपोर्ट की मांग की जा रही है।

आधिकारिक बयान के अनुसार, सभी संबंधित अधिकारी मानते हैं कि ठेकेदार की वजह से यह स्थिति उत्पन्न हुई। बीडीओ बद्री प्रसाद वर्मा ने कहा कि “हम ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई करने की योजना बना रहे हैं।” जब जिम्मेदार सूचना बाहर आ रही है, तब यह भी ध्यान में आ रहा है कि किस प्रकार से सामाजिक आयोजनों में यह गलतियां बार-बार हो रही हैं। इस प्रकार के समारोहों में जब भोजन की कमी होती है, तो यह न केवल प्रभावित परिवारों की चिंताओं को बढ़ाता है, बल्कि समाज में एक नकारात्मक संदेश भी फैलाता है।

यह घटना इस बात का प्रतीक है कि हमें इस तरह के सामूहिक आयोजनों में बुनियादी सुविधाएं और व्यवस्थाओं की ओर गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है। यह न केवल दूल्हा-दुल्हन के लिए बल्कि उनके 家族 और मेहमानों के लिए भी एक सोचनीय मुद्दा है। समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों ने पूरी तरह से इस घटना का संज्ञान लिया है, लेकिन क्या यह वास्तव में उचित है कि ऐसी व्यवस्थाओं के लिए ठेकेदारों को दोषी ठहराया जाए, जब जवाबदेही अधिकारी की होनी चाहिए?

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