सिनेमाजगत में हलचल: रितेश देशमुख का सवाल – 600 करोड़ की कमाई, लेकिन फिल्में फलॉप?
बॉलीवुड में कॉमिक एक्टर के रूप में पहचाने जाने वाले रितेश देशमुख ने अपने करियर में कई विविध भूमिकाएं निभाई हैं। हाल ही में, उन्होंने अजय देवगन की नई फिल्म ‘रेड-2’ में एक विलेन के रूप में अपने अभिनय का लोहा मनवाया है, जिसके लिए उन्हें सकारात्मक समीक्षाएँ भी मिली हैं। इस बातचीत में रितेश ने अपने पिछले निगेटिव रोल ‘एक विलेन’ का भी जिक्र किया। दैनिक भास्कर से हुई चर्चा में रितेश और फिल्म के निर्देशक राजकुमार गुप्ता ने फिल्मों और ओटीटी प्लेटफार्मों के बीच जारी बहस के साथ-साथ बॉलीवुड इंडस्ट्री के चुनौतीपूर्ण दौर पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
राजकुमार ने कहा कि जब से सिनेमा की शुरुआत हुई है, तब से इसके खत्म होने की बातें उठती रही हैं। चाहे वह 1920 के दशक का महान अवसाद हो, टेलीविजन का आगमन हो, या फिर वीडियो कैसेट का समय, हर युग में इसी तरह की आशंकाएँ व्यक्त की गई हैं। राजकुमार ने यह भी स्वीकार किया कि जमीनी कहानियों की कमी की बात में कुछ सच्चाई है, लेकिन सभी को इस मुद्दे पर मिलकर चिंतन करने की आवश्यकता है कि क्या सिनेमा की दिशा सही है। अगर कोई समस्या है, तो इसे सुधारने का प्रयास किया जाना चाहिए।
रितेश ने इस पर सहमति जताते हुए कहा कि हिंदी सिनेमा की लोकप्रियता को देखते हुए, ऐसे कई उदाहरण मौजूद हैं जो दर्शाते हैं कि दर्शक अभी भी थियेटर जाना पसंद करते हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि पैंडेमिक से पहले ‘बाहुबली’ जैसी फिल्मों ने बड़ी कमाई की थी, और उसके बाद भी कई फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया है। रितेश का मानना है कि दर्शक केवल अच्छी कहानियों और ट्रेलरों के आधार पर फिल्म देखने का निर्णय लेते हैं। इसलिए, अगर फिल्म की कहानी और उसका प्रचार प्रभावी है, तो दर्शक निश्चित रूप से थियेटर जाएंगे।
इस संदर्भ में, रितेश ने ओटीटी प्लेटफार्मों के उदय को एक नैसर्गिक परिवर्तन के रूप में देखा। उन्होंने कहा कि सभी चीजें समय के साथ बदलती हैं। जैसे पहले समाचार पत्रों का अस्तित्व था, अब डिजिटल प्लेटफॉर्म्स हावी हो गए हैं। इसी तरह, फिल्म इंडस्ट्री को भी डिजिटल माध्यमों के साथ तालमेल बिठाने की आवश्यकता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि आज के समय में क्रिकेट के लिए डिजिटल राइट्स की मांग तेजी से बढ़ी है। फिल्मों के मामले में भी डिजिटल माध्यमों को एक विकल्प के रूप में देखना चाहिए।
राजकुमार ने इस पर सहमति जताते हुए कहा कि जब वे फिल्म बनाते हैं, तो थियेटर को प्राथमिकता देते हैं। उनका प्रयास होता है कि फिल्में सबसे पहले थियेटर में रिलीज हों और फिर अन्य माध्यमों पर जाएं। उन्होंने दर्शकों से अपेक्षा की कि वे फिल्मों को थियेटर में देखकर एक अलग अनुभव प्राप्त करें, जिसके बाद वे अन्य प्लेटफॉर्म पर देख सकें। यह स्पष्ट है कि रितेश और राजकुमार दोनों का मानना है कि सिनेमा का भविष्य बेहद रोशन है, बशर्ते निर्माता और दर्शक मिलकर नवीनतम बदलावों को अपनाएं।