मथुरा में चमत्कार! प्रेमानंद महाराज पर गिरी लोहे की त्रासदी, भक्तों ने बचाई जान
मथुरा के वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज की पदयात्रा के दौरान एक गंभीर घटना हुई, जिसमें वह बाल-बाल बच गए। यह घटना तब घटी जब उनके स्वागत के लिए मार्ग में लगाए गए लोहे के भारी ट्रेस का एक हिस्सा अचानक गिरने लगा। संत प्रेमानंद महाराज का स्वागत करने के लिए कई स्थानों पर सजावट और स्वागत द्वार बनाए गए थे, जिसमें लोहे का यह भारी ट्रेस भी शामिल था। उसकी भारी भरकम संरचना के कारण उसका संतुलन बिगड़ गया और यह संत के ठीक सामने गिरने लगा। सौभाग्य से, उपस्थित लोगों और आयोजकों ने इसे गिरने से पहले पकड़ लिया, जिससे संत महाराज और श्रद्धालुओं को कोई नुकसान नहीं हुआ।
इस घटना के बाद कुछ समय के लिए श्रद्धालुओं में अराजकता और अफरातफरी फैल गई। लोग यहां-वहां भागने लगे, लेकिन आयोजकों और सुरक्षाकर्मियों ने जल्दी से स्थिति को सामान्य कर लिया। इसके बाद संत प्रेमानंद महाराज ने सभी को शांत रहने की सलाह दी और अपनी पदयात्रा को जारी रखा। संत के इस शांतिपूर्ण संदेश ने उपस्थित भीड़ में थोड़ी सी शांति लौटाई और यात्रा बिना किसी और बाधा के आगे बढ़ी।
हालांकि, इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। प्रशासन और पदयात्रा के आयोजकों पर श्रद्धालुओं ने लापरवाही बरतने के आरोप लगाए हैं। प्रशासन ने इस मामले की गंभीरता को समझते हुए भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए कड़े इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं। इससे पहले, 2 मई को केली कुंज आश्रम ने भक्तों को सूचित किया था कि प्रेमानंद महाराज की रात्रिकालीन यात्रा बंद कर दी गई है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि यह यात्रा कब तक के लिए रोकी गई है।
इसके साथ ही, सेवादारों ने भक्तों को बताया कि संत प्रेमानंद महाराज की तबीयत ठीक नहीं है और इसलिए वह पदयात्रा नहीं करेंगे। इस सूचना के बाद भक्त निराश होकर लौट गए। हाल ही में संत के जन्मदिन को लेकर हुए उत्सव में देशभर से लाखों भक्त शामिल हुए थे, जिसमें श्रद्धालुओं ने रास्ते को सुंदरता से सजाया था। इसी दौरान प्रेमानंद महाराज को लगातार स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, जिसके चलते उन्हें नियमित डायलिसिस की जरूरत है।
संत प्रेमानंद महाराज को लगभग 20 वर्षों से किडनी की समस्या है। पिछले कुछ समय से उनके डायलिसिस की आवृत्ति बढ़ गई है, जिसमें उन्हें हर हफ्ते 4 से 5 बार डायलिसिस करवाना पड़ता है। उनका इलाज श्री कृष्णम शरणम् सोसाइटी में ही किया जाता है, जहां उनके दो फ्लैट हैं। एक फ्लैट में वह रहते हैं और दूसरे में उनका डायलिसिस का इंतजाम किया गया है। संत प्रेमानंद महाराज की स्थिति के बारे में आश्रम से जारी सूचना ने भक्तों को उनकी सेवा की गंभीरता का भी प्रसंग प्रस्तुत किया है।
इन घटनाओं ने भक्तों और प्रशासन दोनों को सक्रिय रहने की प्रेरणा दी है ताकि भविष्य में सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह की घटनाएं न हो। संत प्रेमानंद महाराज की भक्ति यात्रा संतों की परंपरा को जारी रखे हुए है, वहीं श्रद्धालुओं के विश्वास को बनाए रखना भी आवश्यक है।