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सांसद का खुलासा: अपर नगर आयुक्त पर जांच रिपोर्ट में हेरफेर का गंभीर आरोप!

सांसद और जिला विकास समन्वय समिति के अध्यक्ष अशोक रावत ने नगर निगम के अपर नगर आयुक्त जगदीश यादव पर भ्रष्टाचार और ब्लैकमेलिंग के आरोप लगाए हैं। सांसद ने यह गंभीर आरोप उस समय उठाए जब जगदीश यादव डूडा के परियोजना अधिकारी के रूप में कार्यरत थे। रावत ने बताया कि इस दौरान जांच समिति को प्रभावित करने का भी प्रयास किया गया था, जो कि बेहद चिंताजनक है।

मिश्रिख सांसद ने नगर आयुक्त सुधीर कुमार को एक पत्र भेजकर अनुरोध किया है कि अपर नगर आयुक्त जगदीश यादव के खिलाफ जांच की जाए। सांसद के पत्र में उल्लेख है कि डीएम के निर्देश पर डूडा के परियोजना अधिकारी के रूप में, निर्माण कार्यों की जांच के लिए एक समिति का गठन किया गया था। रिपोर्ट में आरोप यह है कि जांच समिति के सदस्यों द्वारा सही रिपोर्ट तैयार करने के लिए रिश्वत मांगी गई।

सांसद के अनुसार, महाराजपुर में डूडा विभाग द्वारा किए गए करीब ढाई करोड़ रुपए के विकास कार्यों को लेकर शिकायत की गई थी। इनमें सड़कों का निर्माण और लाइटिंग का कार्य शामिल था। शिकायत के बाद, इस मामले को दिशा की बैठक में भी उठाया गया, जिसके परिणामस्वरूप डीएम द्वारा एक जांच समिति बनाई गई। इस समिति में अपर नगर आयुक्त को सदस्य के तौर पर शामिल किया गया था। सांसद ने स्पष्ट आरोप लगाया कि यदि रिश्वत नहीं मिलती तो कमीशन के सदस्य अपनी रिपोर्ट पर सिग्नेचर नहीं करते थे।

सांसद रावत ने इस मामले में ब्लैकमेलिंग का भी आरोप लगाया है, और नगर आयुक्त से अनुरोध किया है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच करवाई जाए और आवश्यक कार्रवाई की जाए। वहीं, जब इस संदर्भ में अपर नगर आयुक्त जगदीश यादव से बात की गई, तो उन्होंने अपनी राय रखते हुए कहा कि उनकी रिपोर्ट और समिति की रिपोर्ट में भिन्नता थी, जिसके चलते उन्होंने सिग्नेचर नहीं किए थे। यादव ने आगे कहा कि उन्होंने अपनी रिपोर्ट डीएम को सौंप दी है और उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को बेबुनियाद करार दिया।

इस घटना ने नगर निगम के कामकाज और प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। जनता की भलाई के लिए जो कार्य किए जा रहे हैं, उनमें इस प्रकार की अनियमितताएं उनके प्रति विश्वास को कमजोर कर सकती हैं। सांसद अशोक रावत के आरोप गंभीर हैं और यदि वे सही साबित होते हैं, तो इससे न केवल प्रशासन में सुधार की आवश्यकता का एहसास होगा, बल्कि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाने की आवश्यकता भी होगी। ऐसे में निष्पक्ष जांच की अपेक्षाएं बढ़ गई हैं, ताकि सचाई सामने आ सके और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जा सके।

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