शादी से पहले हेयर ट्रांसप्लांट कराई, इंजीनियर की मौत का चौंकाने वाला सच!
कानपुर में पनकी पावर प्लांट के सहायक इंजीनियर विनीत की हाल ही में हेयर ट्रांसप्लांट के दौरान आकस्मिक मौत हो गई, जिसने चिकित्सा क्षेत्र में एक गंभीर सवाल उठाया है। उनकी पत्नी जया ने बताया कि ट्रांसप्लांट के बाद विनीत के चेहरे पर अत्यधिक सूजन आ गई थी, जिससे उनका चेहरा गुब्बारे जैसा हो गया और आंखें भी बाहर आ गई थीं। उसके बाद वह पहचान में नहीं आ रहे थे। इस घटना के 54 दिन बाद पुलिस ने FIR दर्ज की है, जिससे स्पष्ट होता है कि इस मामले में कोई अनियमितता हो सकती है। सबसे alarming बात यह है कि जिस क्लिनिक में यह ट्रांसप्लांट किया गया, वहां डर्मेटोलॉजिस्ट या प्लास्टिक सर्जन की उपस्थिति नहीं थी। इस घटना ने यह प्रश्न उठाया है कि हेयर ट्रांसप्लांट से क्या वास्तव में जान का खतरा है और इसके लिए क्या सावधानियाँ बरती जानी चाहिए।
हेयर लॉस, जिसे आमतौर पर गंजेपन के रूप में जाना जाता है, इसके चार मुख्य कारण होते हैं। पहला आनुवांशिकता, जिसे अधिकांशतः पुरुषों में देखा जाता है। हार्मोन टेस्टोस्टेरोन के एक अन्य रूप डिहाइड्रो टेस्टोस्टेरोन (DHT) का बढ़ता स्तर इसकी एक मुख्य वजह है। दूसरा कारक खानपान है; पोषक तत्वों जैसे बायोटिन और प्रोटीन की कमी बालों की स्वास्थ्य को बिगाड़ सकती है। तीसरा कारक है जीवनशैली; अत्यधिक तनाव और केमिकलयुक्त उत्पादों का उपयोग बालों की जड़ों को कमजोर कर सकता है। अंत में, हार्मोनल बदलाव भी गंजेपन का एक कारण होता है, खासकर महिलाओं में थायराइड और पीसीओडी जैसी समस्याओं के कारण।
हेयर ट्रांसप्लांट के लिए मुख्यतः दो तकनीकें इस्तेमाल की जाती हैं – फोलिक्यूलर यूनिट ट्रांसप्लांटेशन (FUT) और फोलिक्यूलर यूनिट एक्सट्रैक्शन (FUE)। पहले तरीके में सिर के बूंद से त्वचा निकाली जाती है और बाल इंप्लांट किए जाते हैं, जबकि दूसरे तरीके में एक-एक बाल निकालकर इंप्लांट किया जाता है, जिससे कोई निशान नहीं रह जाता। लेकिन यह ध्यान रखना आवश्यक है कि कुछ वर्ग के लोगों को ट्रांसप्लांट नहीं कराना चाहिए, जैसे डायबिटीज़ और उच्च रक्तचाप के रोगी।
मौत की आशंका के बारे में विशेषज्ञों का कहना है कि हेयर ट्रांसप्लांट के बाद मौत बहुत ही दुर्लभ है। हालांकि, ऑपरेशन के पहले 24 घंटे में रोगी की निगरानी आवश्यक होती है। एक ग्लोबल स्टडी के अनुसार, ऐसी सर्जरी में मौत की दर लगभग 20 प्रति लाख है, जो मुख्यतः दवाओं के दुष्प्रभावों या एनेस्थीसिया के प्रति प्रतिक्रियाओं से होती है। हालाँकि, कानपुर की घटना ने यह बात स्पष्ट कर दी है कि क्लिनिक में योग्य चिकित्सकों की अनुपस्थिति कितनी खतरनाक हो सकती है।
हेयर ट्रांसप्लांट कराने वाले लोगों को कुछ सावधानियाँ बरतनी चाहिए, जैसे कि ट्रांसप्लांट के बाद कम से कम 7-10 दिन तक बालों को न छुएं और कई दिनों तक हेलमेट या टोपी न पहनें। इसके अतिरिक्त, कोई भी डाइट किनारे नहीं लगानी चाहिए। विशेष रूप से, बिना विशेषज्ञ की सलाह के हेयर डाई या हेड मसाज कराने से बचना चाहिए। एक्सपर्ट का कहना है कि आशंका के बावजूद ट्रांसप्लांट के परिणाम सामान्यतः सकारात्मक होते हैं, और 6 माह बाद बालों की ग्रोथ पूर्ण रूप से वापसी करती है।
अंततः, हेयर ट्रांसप्लांट की जटिलताओं और इसके साथ जुड़े खतरों को समझना अत्यंत आवश्यक है। कानपुर की घटना एक सतर्कता का संकेत है कि मरीजों को कितना सावधानी बरतनी चाहिए और योग्य चिकित्सक से ही उपचार करवाना चाहिए। विशेषज्ञों का मत है कि इस क्षेत्र में सुधार के लिए सख्त नियमों की आवश्यकता है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।