News Chetna

सच की ताजगी, आपकी अपेक्षा

Punjab

जीएनडीयू ग्राउंड की गैर-शैक्षणिक गतिविधियों पर खिलाड़ियों का फूटा गुस्सा!

अमनदीप सिंह| अमृतसर के गुरु नानक देव विश्वविद्यालय ने शिक्षा, खेल और सह-पाठयक्रम गतिविधियों के क्षेत्र में जो नाम कमाया है, अब वह राजनीतिक और गैर-राजनीतिक हस्तियों के लिए एक आरामगाह बन चुका है। इस परिवर्तन से विश्वविद्यालय के विद्यार्थी और सम्पूर्ण वर्ग अति चिंतित हैं। ज्ञातव्य है कि गुरु नानक देव विश्वविद्यालय ने देश में अपनी उत्कृष्टता के चलते माका ट्रॉफी को 25 बार अपने नाम किया है, जो कि एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यहां का एथलेटिक्स ग्राउंड, जिसे खिलाड़ी और शारीरिक शिक्षा विभाग के शिक्षक बहुत ही श्रद्धा के साथ देखते हैं, अब सरकारी आयोजनों के लिए उपयोग किया जा रहा है।

खिलाड़ी यहां की मिट्टी को माथे पर लगाकर अपने अभ्यास की शुरुआत करते हैं, लेकिन अब जिला पुलिस और सिविल प्रशासन के अधिकारी अपने राजनीतिक आकाओं को खुश करने के लिए इस मैदान का दुरुपयोग कर रहे हैं। मैदान में भारी उपकरण जैसे क्रेन, लोहे और जस्ता के गार्डर, पाइप, बड़े नट-बोल्ट आदि आ चुके हैं। इनकी स्थापना के लिए जिला पुलिस और प्रशासन पहले से ही जुटे हुए हैं। इस स्थिति के चलते विश्वविद्यालय के सभी जिम्मेदार पक्षों को सुरक्षा और जांच के नाम पर बाहर रहना पड़ रहा है। यह स्थिति विद्यार्थियों और खिलाड़ियों के लिए असुविधाजनक साबित हो रही है।

इस मामले की संजीदगी को देखते हुए सरकार और संबंधित विभागों को उचित कदम उठाने की आवश्यकता है। जब इस मुद्दे पर विवि के वाइस चांसलर प्रो. डॉ. करमजीत सिंह से जानकारी ली गई, तो उन्होंने कहा कि वे इस पूरी प्रक्रिया पर व्यक्तिगत रूप से निगरानी रखेंगे। उनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि खिलाड़ियों और विद्यार्थियों को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि विवि प्रशासन खिलाड़ियों के अधिकारों की सुरक्षा में कोई कमी नहीं आने देगा।

हालांकि, विद्यार्थियों का मानना है कि ऐसे आयोजनों के चलते उनके अध्ययन और खेलकूद के लिए अनुकूल वातावरण प्रभावित हो रहा है। छात्र समुदाय ने इस स्थिति के प्रति विरोध व्यक्त किया है, साथ ही प्रशासन से मांग की है कि खेल के मैदानों का उपयोग केवल खेल गतिविधियों के लिए ही किया जाए, न कि राजनीतिक आयोजनों के लिए। खिलाड़ी इस बात पर जोर दे रहे हैं कि उनका अभ्यास क्षेत्र सुरक्षित और निर्बाध रहना चाहिए।

अंत में, यह स्पष्ट है कि गुरु नानक देव विश्वविद्यालय की पहचान और इसकी स्वतंत्रता को बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। प्रशासन को गंभीरता से इस मुद्दे पर विचार करना चाहिए ताकि विद्यार्थियों की मानसिकता और भविष्य के विकास पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े। खेल के मैदान का सही उपयोग और उसके प्रति सम्मान बनाए रखना न केवल विश्वविद्यालय की गरिमा के लिए जरुरी है, बल्कि विद्यार्थियों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए भी महत्त्वपूर्ण है।

Leave a Reply