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60 हजार रिश्वत मांगने वाला पुलिस कांस्टेबल पकड़ाया!

**भास्कर न्यूज** | अमृतसर में विजिलेंस टीम ने सीआईए-2 के स्टाफ में तैनात कांस्टेबल आदर्शदीप सिंह को रिश्वत मांगने के आरोप में गिरफ्तार किया है। आरोप है कि कांस्टेबल ने नशा तस्करी के मामले में एक शिकायतकर्ता से 60,000 रुपए की मांग की थी, ताकि वह उसके पड़ोसी कृष्ण कुमार के खिलाफ एफआईआर दर्ज न करें। उल्लेखनीय है कि कृष्ण कुमार पहले नशा तस्करी में शामिल था, लेकिन वर्तमान में वह एक निजी सुरक्षा गार्ड के रूप में काम कर रहा है।

शिकायतकर्ता के अनुसार, आरोपी कांस्टेबल ने पहले ही उनसे 50,000 रुपए की राशि ले ली थी और अब बाकी पैसे की मांग कर रहा था। शिकायतकर्ता का कहना है कि सीआईए-2 की टीम ने कृष्ण कुमार के घर पर छापा मारा था, लेकिन वहां से कुछ भी अवैध सामग्री नहीं मिली थी। इस संदर्भ में विजिलेंस ब्यूरो के प्रवक्ता ने पुष्टि की है कि शिकायत के आधार पर यह कार्रवाई की गई है और इससे संबंधित सही जानकारी मिलने पर आरोपी कांस्टेबल को गिरफ्तार किया गया है।

मुख्यमंत्री की भ्रष्टाचार विरोधी एक्शन लाइन पर दर्ज की गई शिकायत के तहत विजिलेंस ब्यूरो ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत कार्रवाई की। जांच में पाया गया कि आरोपी कांस्टेबल ने भ्रष्टाचार रोकथाम कानून का उल्लंघन किया है। इस वजह से उसके खिलाफ मामला दर्ज कर उसे हिरासत में लिया गया है। आरोपी को बुधवार को अदालत में प्रस्तुत किया जाएगा, जहां उसकी जमानत पर सुनवाई की जाएगी।

विजिलेंस ब्यूरो का यह कदम इस बात का संकेत है कि सरकारी मशीनरी भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के लिए तत्पर है। इससे यह संदेश भी जाता है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है, चाहे वह कितनी ही ऊंची कुर्सी पर क्यों न बैठा हो। इस तरह की घटनाएं सरकारी कर्मचारियों के बीच एक नई चेतना का संचार कर सकती हैं और लोगों को न्याय दिलाने में मदद कर सकती हैं।

आरोपी कांस्टेबल की गिरफ्तारी ने पूरे अमृतसर में चिंता का माहौल पैदा कर दिया है, जहां लोग सरकारी विभाग में अपराधिक गतिविधियों की बढ़ती प्रवृत्तियों के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि उन्हें डर के बिना मामले दर्ज करने का हक मिलना चाहिए। विजिलेंस ब्यूरो की कार्रवाई ने यह सुनिश्चित किया है कि यदि कोई नागरिक गलत तरीके से परेशान होता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

इस घटना के पीछे के तथ्यों की गहराई से जांच पड़ताल की जा रही है और यह माना जा रहा है कि इस तरह की कार्रवाई से जनता का विश्वास कानून के प्रति मजबूत होगा। यह एक संकेत है कि सरकारी तंत्र में कार्यरत भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाना अब पहले से ज्यादा आसान हो गया है।

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