क्या पति की अनुमति के बिना गुरु के पास जाना मना?: प्रेमानंद महाराज का विवाहिताओं को संदेश!
4 मार्च को वृंदावन में संत प्रेमानंद जी महाराज के सत्संग में एक महिला ने एक महत्वपूर्ण सवाल उठाया जिसमें उसने पूछा कि, “अगर पति और गुरु की बातों में मतभेद हो, तो स्त्री को किसका पालन करना चाहिए?” कई महिलाओं के मन में इस तरह के प्रश्न होते हैं, जहां परिवारिक संस्कार और आध्यात्मिक मार्ग का सामंजस्य बैठाना मुश्किल होता है। संत प्रेमानंद ने इस पर अपने विचार व्यक्त किए, जिसमें उन्होंने कहा कि विवाहित महिलाओं के लिए उनके पति को परमेश्वर के समान मानना चाहिए। उनका यह भी कहना था कि यदि पति किसी कार्य से मना करें, तो स्त्री को गुरु के पास भी नहीं आना चाहिए और उसे अपने पति की इच्छाओं का सम्मान करना चाहिए।
संत प्रेमानंद जी ने कहा कि यदि पति किसी धार्मिक गतिविधि में भाग लेने से मनाही करते हैं, तो उस स्थिति में पत्नी को मनोयोग से गुरु के उपदेशों का स्मरण करना चाहिए। यह सलाह इस दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है कि पति और पत्नी के बीच सामंजस्य बना रहे। इसके अतिरिक्त, उन्होंने जोर दिया कि पत्नी को अपने पति की सेवा करनी चाहिए और उन्हें अपने जीवन का केंद्र मानना चाहिए। यही एक स्वस्थ दांपत्य जीवन के लिए आवश्यक है।
संयोगवश, 24 फरवरी को भी संत प्रेमानंद ने विवाह संबंधी सवालों पर अपनी राय प्रस्तुत की थी। एक महिला ने सवाल किया था कि जब उसकी शादी परिवार के दबाव में हुई है, तो क्या उसे अपने पूर्व संबंधों के बारे में अपने पति को बताना चाहिए। संत जी ने इस पर सलाह दी कि महिलाओं को चाहिए कि वे अपने बीते रिश्तों के बारे में ना ही बताएं, क्योंकि इससे पति के प्रेम में कमी आ सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भूतकाल के संबंधों को भूलकर वर्तमान में अपने पति के प्रति वफादार रहना चाहिए।
संत प्रेमानंद ने कहा कि जो महिलाएं मاضی के प्रेम के लिए अपने पति से माफी मांगने की सोचती हैं, उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए। विवाह के बाद, किसी भी बाहरी व्यक्ति के प्रति आकर्षण उत्पन्न नहीं होना चाहिए। अगर पुरानी गलतियों की बात आती है, तो उन्हें छुपाना ही बेहतर होता है। उन्होंने यह भी कहा कि पति और पत्नी को एक-दूसरे के प्रति सम्मान और समर्पण रखना चाहिए, जिससे परिवार के रिश्तों में मजबूती बने।
संत जी ने एक सकारात्मक दृष्टिकोण रखते हुए कहा कि पत्नी के प्रेम के बल पर यमराज भी अपने पति का जीवन वापस पा सकती है। इससे यह स्पष्ट होता है कि दांपत्य जीवन में प्रेम, विश्वास और सम्मान कितना महत्वपूर्ण है। संत प्रेमानंद जी की सलाह इस विषय में गहरी समझ और संतुलन का प्रतीक है, जो विवाह संबंधों में आध्यात्मिक मार्ग को गहराई से जोड़ता है।
वहीं, एक अन्य मुद्दे पर, मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद शमी के रमजान के दौरान एनर्जी ड्रिंक पीने पर अपनी नाराजगी व्यक्त की। उनका कहना है कि इस कार्य ने धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई है। इस प्रकार के विचार और घटनाएं समाज में धार्मिक आचार-व्यवहार पर भी प्रभाव डालती हैं।
इसमें कोई संशय नहीं है कि संत प्रेमानंद जी और मौलाना शहाबुद्दीन जैसे धार्मिक नेता समाज में नैतिक मूल्य बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।