बाघ का खौफ: यूपी में मुखौटे फेल, 6 साल में 59 की जान गई!
उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में तेंदुए का आतंक बढ़ता जा रहा है, जिसके चलते लोग अपनी सुरक्षा के लिए अनोखी उपाय कर रहे हैं। हाल ही में एक महिला पर तेंदुए के हमले में उसकी जान चली गई, जिससे क्षेत्र में भय की स्थिति और गंभीर हो गई है। पिछले तीन वर्षों में इस क्षेत्र में 27 लोग तेंदुओं के हमले का शिकार हो चुके हैं, जबकि एक हजार से अधिक लोगों को हल्की चोटें आई हैं। बिजनौर के धामपुर, चांदपुर और सदर तहसील में तेंदुओं का आतंक सबसे अधिक है। इसके जवाब में गांववाले सिर के पीछे मुखौटा पहनकर बाहर निकल रहे हैं, ताकि तेंदुओं को भ्रमित करके अपनी सुरक्षा सुनिश्चित कर सकें। हालाँकि, यह उपाय भी हमलों को रोकने में सफल नहीं हो रहा है।
उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में जंगली जानवरों का खतरा बढ़ता जा रहा है। विशेष रूप से लखीमपुर खीरी और पीलीभीत, जहाँ बाघों का आतंक विद्यमान है। पीलीभीत टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन क्षेत्रफल सीमित होने के कारण स्थिति भी जटिल होती जा रही है। पिछले कुछ वर्षों में भेड़ियों के हमलों ने भी किसानों और ग्रामीणों में भय पैदा कर दिया है, विशेषकर सीतापुर, बहराइच और लखीमपुर खीरी में, जहाँ भेड़ियों ने बच्चों को निशाना बनाया।
बिजनौर में तेंदुओं के हमलों की बढ़ती संख्या का एक कारण यह माना जा रहा है कि पिछले कुछ वर्षों में क्षेत्र का शहरीकरण तेजी से बढ़ा है, जिसने जंगली जानवरों के प्राकृतिक आवास को कम किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि बिजनौर के पास बहने वाली गोमती नदी के किनारे तेंदुए सर्दियों में आते हैं और कोहरे में छुपकर लोगों के संपर्क में नहीं आते। जब मौसम साफ होता है, वह आबादी वाले क्षेत्रों में फंस जाते हैं। वन विशेषज्ञ डॉ. विकास श्रीवास्तव ने यह बताया कि परिस्थितियों के कारण तेंदुओं की संख्या में भी वृद्धि हो रही है और इस समस्या को सुलझाने के लिए तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है।
बिजनौर जिले में मृतक महिला सुमन के बेटे ने बताया कि उसने अपनी मां को खेत में तेंदुए के मुंह में देखा था। स्थिति इतनी भयावह हो गई है कि अब लोग अपने खेतों और घरों से घ گھر के बाहर जाने में डरते हैं। गांव के पूर्व प्रधान ने बताया कि मजदूर अब काम करने के लिए तैयार नहीं हैं, क्योंकि तेंदुए का खौफ उनके मन में बैठ चुका है। वन विभाग को यह चिंता है कि यदि तेंदुओं को जल्दी नहीं पकड़ा गया, तो हालात और बिगड़ सकते हैं, क्योंकि मादा तेंदुओं की संख्या बढ़ रही है और वे बच्चे पैदा कर रही हैं।
तेंदुओं के हमलों का सामना करने के लिए बनाए गए मुखौटों का प्रयोग पहली बार सुंदरवन क्षेत्र में किया गया था, और अब इसे बिजनौर में आजमाया जा रहा है। वन विभाग के अधिकारियों का अनुमान है कि इस प्रकार का उपाय तेंदुओं के खिलाफ प्रभावी हो सकता है, लेकिन परिणाम अभी भी देखना बाकी है। साथ ही, उपराज्यपाल ने वन विभाग से अधिक पिंजरे लगाने और तेंदुओं को पकड़ने की कार्रवाई को जल्द से जल्द पूरा करने का निर्देश दिया है। इस परिस्थिति में तेंदुए की बढ़ती संख्या और उनके मानव संपर्क को नियंत्रित करने के लिए ठोस उपायों की आवश्यकता है।