पुराने डस्टबिन के होते नए, 2600 में मिली ठेकेदारी, बाजार भाव 5200!
ग्रेटर नगर निगम में चल रहे एक गंभीर भ्रष्टाचार के मामले की सच्चाई अब धीरे-धीरे सामने आ रही है। यह मामला तब प्रकाश में आया जब नया ठेकेदार शहर में डस्टबिन लगाने का कार्य कर रहा था। इस ठेकेदार ने पुराने डस्टबिन को फिर से साफ करके और उन्हें रंग-रोगन करके नए के रूप में पेश किया है। हैरत की बात यह है कि इन डस्टबिनों को निगम की गाड़ी द्वारा ठेकेदार के पास पहुंचाया जा रहा है। जब भास्कर ने इस मामले की पड़ताल करने का निर्णय लिया, तो उन्होंने देखा कि पिछले 11 वर्षों में निगम ने 14 हजार से ज्यादा डस्टबिन लगाने का दावा किया है, लेकिन शहर में केवल 1382 डस्टबिन ही दिखाई दिए।
भास्कर की टीम ने शहर के विभिन्न स्थानों पर जाकर डस्टबिनों की गिनती की। खासकर जेएलएन मार्ग, सिविल लाइंस और अन्य प्रमुख सड़कों पर इन्हें खोजा गया। हालांकि, एयरपोर्ट और सिविल लाइंस सहित कुछ इलाकों में ही डस्टबिन मिले। यह जानकर और भी चौंकाने वाली बात यह थी कि ग्रेटर निगम ने नये डस्टबिनों की स्थापना के लिए 88 लाख रुपये का ठेका दिया था, जबकि ठेकेदार ने डस्टबिन को बेहद कम कीमत पर स्थापित करने का दावा किया था। यहां सवाल उठता है कि इस तरह की मिलीभगत के पीछे कौन है?
भास्कर की जांच में यह भी सामने आया कि निगम की गाड़ी इन पुराने डस्टबिनों को उखाड़कर ठेकेदार के पास ले जा रही थी, जहां उन्हें नवीनीकरण के लिए रखा जा रहा था। ये डस्टबिन जगतपुरा, भांकरोटा, मुरलीपुरा जैसे वार्डों से उठाए जा रहे थे और उन पर नए स्टीकर लगाकर उन्हें नए के रूप में बेचा जा रहा था। यह सब कुछ निगम अधिकारियों की जानकारी और सहमति से हो रहा था।
इस मामले में सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब ठेकेदार पुराने डस्टबिनों को नवीनीकरण के लिए ले जा रहा था, तो निगम ने इसके लिए कोई ऑडिट क्यों नहीं कराया? कर्मचारियों द्वारा पुराने डस्टबिन स्वच्छता और गुणवत्ता के जाँच के बिना ही फिर से उपयोग किए जा रहे थे। यह स्पष्ट है कि डस्टबिनों की चोरी का श्रेय किसी अन्य को देने की कोशिश की जा रही है, जबकि असलियत यह है कि यह सब एक सुनियोजित भ्रष्टाचार का हिस्सा है।
इस स्थिति में अब आवश्यकता है कि अधिकारी इस मामले की पूरी जांच करें और शहरवासियों को यह बताएं कि आखिरकार उनके टैक्स का पैसा किस तरह से बर्बाद हो रहा है। जनता की भलाई के लिए जो ठेके दिए जाते हैं, उनमें पारदर्शिता एवं ईमानदारी की आवश्यकता है। यदि भ्रष्टाचार की इस कड़ी को नहीं रोका गया, तो यह न केवल शहर के विकास को प्रभावित करेगा, बल्कि नागरिकों के बीच विश्वास भी डगमगा सकता है।