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हुई 10 करोड़ से ज्यादा की रिकवरी, अब समिति करेगी टेस्टिंग का काम!

राज्य सरकार ने माइंस विभाग की बकाया राशि की वसूली को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इस निर्णय के तहत, 10 करोड़ रुपए या उससे अधिक की बकाया राशि वाले प्रकरणों की समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है। इस समिति की अध्यक्षता अतिरिक्त निदेशक माइंस मुख्यालय करेंगे। गठित समिति में वित्तीय सलाहकार माइंस विभाग, संयुक्त विधि परामर्शी उदयपुर और जयपुर जैसे प्रवर लोग शामिल हैं, और साथ ही जयपुर, कोटा, उदयपुर तथा जोधपुर के अतिरिक्त निदेशक भी सदस्य के रूप में मौजूद रहेंगे।

राज्य सरकार के अनुसार, 10 करोड़ रुपए या उससे अधिक की बकाया राशि से संबंधित 50 से अधिक मामले न्यायालयों में विचाराधीन हैं, जिससे राज्य को हजारों करोड़ रुपए की वसूली करनी है। इस विषय पर प्रमुख सचिव माइंस, टी. रविकांत ने बताया कि इस समिति का मुख्य उद्देश्य इन प्रकरणों की गुणात्मक और मात्रात्मक समीक्षा करना है। समिति न्यायालय में प्रभावी पैरवी के लिए आवश्यक सुझाव भी तैयार करेगी और अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को प्रस्तुत करेगी।

राज्य सरकार ने प्रकरणों में शामिल अन्य अधिकारियों को भी निर्देशित किया है कि वे अदालतों में लंबित मामलों को जल्दी से निपटाने के लिए आवश्यक कदम उठाएं। इनमें स्टे प्रकरणों में स्टे हटवाने और अन्य मामलों में राज्य सरकार का पक्ष मजबूती से रखने के लिए भी निर्देश दिए गए हैं। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि न्यायालयों में लंबित प्रकरणों का शीघ्रता से निपटारा किया जाए जिससे राज्य सरकार की बकाया राजस्व की वसूली की जा सके।

माइंस विभाग से जुड़ी रिकवरी के लगभग 350 मामले विभिन्न न्यायालयों में लंबित हैं। इस संदर्भ में, विभाग ने एक चयनित प्रक्रिया अपनाई है जिसमें 10 करोड़ रुपए या उससे अधिक के मामलों की पहचान की गई है। यह भी सुना जा रहा है कि सरकार जल्द ही 1 करोड़ रुपए या इससे अधिक के मामलों पर निर्णय लेने की योजना बना सकती है।

इस वित्तीय वर्ष में खान विभाग का राजस्व संग्रहण 7513 करोड़ रुपए को पार कर गया है, और विभाग चाहता है कि यह आंकड़ा और भी बढ़े। इसी उद्देश्य से इस समिति का गठन किया गया है ताकि वसूली की प्रक्रिया को त्वरित किया जा सके और राज्य सरकार की राजस्व दरों में बढ़ोतरी की जा सके।

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