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खरसाण की आग परंपरा: होलिका में आग से उठी लहरें, राज्यपाल का दौरा रद्द!

होलिका दहन के अवसर पर उदयपुर शहर में उल्लास और उत्साह का अद्भुत माहौल देखने को मिला। विभिन्न गली-मोहल्लों में होलिका दहन की रस्म निभाई गई, जबकि प्रमुख स्थलों पर यह आयोजन रात करीब सवा ग्यारह बजे किया गया। जगदीश चौक और सुभाष चौक पर स्थायी रूप से होलिका दहन के लिए बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हुए थे। सिटी पैलेस में भी होलिका दहन का आयोजन परंपरागत तरीके से किया गया, जिसमें शहर के नागरिकों के साथ-साथ पर्यटकों ने भी भाग लिया।

जगदीश चौक में होलिका दहन लगभग 11:45 बजे किया गया, जहां नगरवासी उत्साहित होकर एकत्र हुए। खासकर यहां होली मनाने के लिए आए पर्यटकों ने भी इस कार्यक्रम में भाग लिया। लोग जगदीश मंदिर की सीढ़ियों से लेकर चौक तक जमा हो गए और होलिका दहन का आनंद लिया। इस अवसर पर सभी ने एक-दूसरे के साथ मिलकर आनंद मनाया और उग्र उत्साह का प्रदर्शन किया।

सिटी पैलेस में होलिका महोत्सव का उद्घाटन मेवाड़ राजपरिवार के सदस्य डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने किया। उन्होंने शाही वस्त्रों में सज-धज कर माणक चौक में प्रवेश किया और पारंपरिक विधि-विधान के अनुसार होलिका का पूजन किया। इस पूजन में पुरोहितों ने मंत्रोच्चार किया और उसके बाद डॉ. लक्ष्यराज ने होलिका को प्रज्वलित किया। इस मौके पर उनके परिवार के अन्य सदस्यों ने भी मिलकर पूजन किया और होली की परिक्रमा की। डॉ. लक्ष्यराज सिंह ने कहा कि होलिका महोत्सव का भारतीय संस्कृति में महत्वपूर्ण स्थान है, जो सामाजिक सद्भाव, स्वास्थ्य और समृद्धि का संदेश देता है।

उदयपुर के सुभाष चौक में होलिका दहन कार्यक्रम का आयोजन रात लगभग 11:20 बजे हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। इस आयोजन में क्षेत्र की प्रमुख हस्तियों ने भी भाग लिया, हालांकि पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया कुछ स्वास्थ्य कारणों के चलते उपस्थित नहीं हो सके। राज्यसभा सांसद चुन्नीलाल गरासिया, आईजी राजेश मीणा और उदयपुर के कलेक्टर नमित मेहता जैसे प्रमुख बयान की उपस्थिति ने इस कार्यक्रम को और भी खास बना दिया।

इस पर्व का उल्लास केवल शहरी क्षेत्रों तक ही सीमित नहीं रहा। उदयपुर जिले के दूरदराज के गांवों जैसे खरसाण में भी होलिका दहन का आयोजन धूमधाम से किया गया। यहां के लोगों ने जलती हुई होली को तोड़ने के लिए अंगारों के बीच से कूदकर अनोखी परंपरा का निर्वाह किया। यह दृश्य न केवल रोमांचक था, बल्कि पारंपरिक उत्सव को मनाने का एक अनूठा तरीका भी था। पूरे उपखंड क्षेत्र में गांवों में होली पर्व के उत्सव का जश्न मनाया गया, जहां माताएं, बहनें, और युवा एकत्रित होकर गीत गाकर और नाचकर होली के इस पर्व का आनंद ले रहे थे।

इस प्रकार, उदयपुर शहर और इसके आसपास के क्षेत्रों में होलिका दहन ने न केवल धार्मिक आस्था को प्रकट किया, बल्कि सामाजिक मेलजोल और समर्पण का भी एक उदाहरण पेश किया। आगामी होली के रंगों के लिए इस पर्व ने लोगों के दिलों में उत्साह भर दिया है।

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