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सीबीआई जांच पर सुप्रीम कोर्ट की रोक: पूर्व मंत्री रामलाल जाट को राहत!

सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व मंत्री रामलाल जाट और एडीजी आनंद श्रीवास्तव के भाई अरविंद श्रीवास्तव सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ सीबीआई जांच पर रोक लगा दी है। इससे पहले हाईकोर्ट ने इन आरोपियों के खिलाफ सीबीआई जांच के आदेश दिए थे, जिसके चलते राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। राज्य सरकार ने अपनी दलील में कहा कि हाईकोर्ट का निर्णय अनुचित था और राज्य पुलिस इस मामले की निष्पक्षता से जांच कर रही है। सरकार का यह भी कहना है कि सीबीआई जांच असाधारण परिस्थितियों में ही की जानी चाहिए, न कि इसे नियमित जांच का विकल्प बनाया जाना चाहिए।

राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में यह स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट ने जांच को सीबीआई को ट्रांसफर करते समय बिना किसी सबूत के पूर्व मंत्री और एक उच्चाधिकारी के भाई की संलिप्तता का हवाला दिया। एडीजी का आरोपों से कोई संबंध नहीं था, क्योंकि उनकी तैनाती आर्मड ब्रांच में थी। सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालय के फैसले पर अंतरिम रोक लगाते हुए राज्य सरकार के तर्कों को स्वीकार किया। इस दौरान, शिकायतकर्ता परमेश्वर जोशी ने राज्य पुलिस पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा कि हाईकोर्ट का आदेश उचित था।

इस मामले में आरोप लगाया गया है कि 2018 से 2021 के बीच आरोपियों ने मिलकर शिकायतकर्ता की खान से मशीनें और उपकरण चुराए थे। इस आरोप में जयपुर निवासी अरविंद श्रीवास्तव उर्फ मनीष धाबाई, मथुरा निवासी श्यामसुंदर गोयल, गाजियाबाद निवासी चंद्रकांत शुक्ला, जोधपुर निवासी राजकुमार विश्नोई और जयपुर निवासी जितेंद्र धाबाई शामिल हैं। गणना के अनुसार, इन आरोपियों ने चोरी की गई सामान को उदयपुर और केरल में बेच दिया। शिकायतकर्ता, जो राजसमंद के माइनिंग व्यवसायी हैं, ने ऐसे आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करवाई थी।

इस मामले की जड़ें तब और गहरी हो गईं, जब पुलिस जांच के दौरान एक आरोपी ने एक फर्जी किराए का समझौता पेश किया। इसी आधार पर दो पुलिस अधिकारियों ने केस में नकारात्मक अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिससे मामले में विवाद बढ़ गया। इसके पीछे यह तर्क दिया गया कि पुलिस अकुशल है और जांच में उसके पक्षपाती होने का आरोप भी लगाया गया।

अब, पूर्व मंत्री रामलाल जाट के खिलाफ धोखाधड़ी के मामले में सीबीआई जांच का आदेश दिया गया है। यह मामला 5 करोड़ के धोखाधड़ी से जुड़ा है, जहां आरोपितों ने माइनिंग व्यवसायी से पैसे की हेराफेरी की। इससे साफ जाहिर होता है कि यह मामला न केवल राजनीतिक बल्कि कानूनी दृष्टि से भी संवेदनशील है, और इससे सभी संबंधित पक्षों की छवि पर असर पड़ सकता है। सुप्रीम कोर्ट का निर्णय इस मामले में जांच की दिशा और प्रक्रिया को प्रभावित करेगा।

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